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करोड़ों खर्च नतीजा सिफर

Mon, 23 Feb 2015 12:20 AM IST
ब्यूूराे अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जनवरी माह तक तैयार की गई प्रदूषण की रिपोर्ट पर नजर डालें तो यमुना का पानी किसी भी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। प्रदूषण भयावह है। आक्सीजन की मात्रा न्यूनतम स्तर 4 मिमी प्रति लीटर पर है। ये स्थिति यमुना में पिछले दो माह से बनी हुई है। इसका बड़ा कारण शहर के नालों का सीधे यमुना में गिरना है। ये नाले आसपास स्थापित औद्योगिक प्लांटों के जहरीले पानी को भी यमुना में गिरा रहे हैं।
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 हालांकि नालों को यमुना में सीधे गिरने से रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं लेकिन हालात से लगता है कि सिर्फ कागजों में ही। आंकड़ों में अहिल्यागंज स्थित एसटीपी की क्षमता 13.5 एमएलडी है। लेकिन मसानी पंपिंग स्टेशन का संचालन निरंतर न होने से इसका पूर्ण उपयोग नहीं किया जा रहा। ऐसे में ये भी पता नहीं है कि एसटीपी अपनी पूर्ण क्षमता पर चल सकती है या नहीं।

यमुनापार स्थित एसटीपी की क्षमता पूर्व में 14.5 एमएलडी थी, जिसमें अब 16 एमएलडी का इजाफा हो गया है। लेकिन ढाक के तीन पात। एसपीएस का संचालन न होने से एसटीपी तक शहर के नालों का पानी नहीं पहुंच पा रहा।
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