मथुरा। एक तरफ सरकार बालिका के पैदा होने पर आर्थिक मदद तक दे रही है तो दूसरी ओर महिला अस्पताल की चिकित्सक लापरवाही की चादर ओढ़े हैं जिसके कारण बृहस्पतिवार को एक नवजात बालिका की जान चली गई।
महिला जिला अस्पताल की चिकित्सकों ने पहले तो अस्पताल में भर्ती महिला को घर भेज दिया। जब टेंपो में बालिका पैदा हो गई तो उसे अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया। तीन घंटे तक अस्पताल के बाहर पड़ी नवजात को जब मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भर्ती किया तो उसकी मौत हो गई। परिजन ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है।
मुस्तकाबाद फिरोजाबाद निवासी मेमजादी पत्नी संजय वर्तमान में अमर कॉलोनी हाईवे पर किराए पर रह रही हैं। बुधवार को उन्हें जब तकलीफ हुई तो वह महिला जिला अस्पताल आ गईं। जहां पर भर्ती तो कर लिया लेकिन दोपहर तीन बजे वापस घर भेज दिया और कहा कि अभी बच्चा 6-7 दिन मेें होगा। जैसे ही वह महिला टेंपो से घर के लिए रवाना हुई घर पहुंचने से पहले ही बालिका को जन्म दिया। परिजन वापस महिला जिला अस्पताल लाए तो ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया।
जिससे नवजात बालिका की तबियत बिगड़ने लगी। अस्पताल के बाहर पड़े हुए परिजन ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कराई तब बृहस्पतिवार दोपहर को भर्ती किया गया। इलाज न मिलने के कारण बालिका ने दम तोड़ दिया। पिता संजय ने बताया कि चिकित्सकों की लापरवाही से उसकी नवजात बालिका की जान गई। वह मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।
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दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी
यह मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी चिकित्सक होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. बीडी भास्कर, सीएमएस महिला जिला अस्पताल।