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Vrindavan: बांकेबिहारी के भक्त ध्यान दें, नये साल पर नई व्यवस्था होगी लागू; अब ऐसे हो सकेंगे ठाकुरजी के दर्शन

Sat, 06 Dec 2025 10:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

नये साल की शुरुआत ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन से करने के लिए लाखों श्रद्धालु देशभर से आएंगे। श्रद्धालुओं की भीड़ से निपटने और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए इसी माह के अंत तक मंदिर के प्रवेश द्वार से निकास द्वार तक रेलिंग लगाई जाएगी। नये साल पर आने वाले श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन करेंगे। इसे लेकर श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाईपावर कमेटी तैयारी कर रही है।
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बांकेबिहारी मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में नए साल पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। भीड़ नियंत्रण करना हाईपावर कमेटी और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। मंदिर में नई दर्शन व्यवस्था लागू करने से पहले आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम सर्वे कर चुकी है। जल्द ही मंदिर के पीछे के चबूतरे वाले हिस्से का भी सर्वे विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा।
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इसे लेकर कमेटी ने योजना बनाई है कि मंदिर के प्रवेश द्वारा दो और तीन के सामने चबूतरे से लेकर मंदिर के चौक और निकास द्वार तक रेलिंग लगाई जाएगी। कमेटी प्रवेश द्वारा पर तीन-तीन लाइन में श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की योजना पर विचार कर रही है जबकि मंदिर के चौक से लेकर निकास द्वार एक और चार तक रेलिंग लगाई जाएगी। इससे मंदिर के चबूतरे से प्रवेश द्वार होते हुए निकास द्वार तक श्रद्धालु रेलिंग में होकर गुजरेंगे।

उच्चाधिकार प्रबंधन समिति ने मंदिर में स्थाई रूप से रेलिंग लगाने के निर्देश दिए हैं। जब तक स्थाई रेलिंग नहीं लगा जाती तब तक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तात्कालिक व्यवस्था की जाएगी। उच्चाधिकार प्रबंधन समिति सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया नये साल पर आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रांगण में रेलिंग लगाकर कतारबद्ध तरीक से प्रवेश देने की विशेष व्यवस्था की गई है।
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गेट संख्या दो और तीन से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रांगण के बीच रेलिंग में प्रवेश कराया जाएगा। इस रेलिंग को भी दो भागों में बांटा गया है, जो गेट संख्या दो से श्रद्धालु आएंगे, वे रेलिंग में होकर गेट संख्या एक से बाहर निकलेंगे। गेट संख्या तीन से आने वाले श्रद्धालु गेट संख्या चार से बाहर निकलेंगे। इससे श्रद्धालु मंदिर में अधिक समय तक नहीं ठहर सकेंगे।
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