वृंदावन। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली द्वारा अयोध्या और भगवान राम को नेपाली बताने का विरोध नेपाली और भारत के धर्माचार्यों ने किया है। धर्माचार्यों ने कहा कि नेपाल से हमारा संबंध ननिहाल का है। धर्माचार्यों और नेपाली समाज के लोगों ने ओली का पुतला फूंका।
काशी विद्वत परिषद एवं नेपाली परिषद की बैठक मोतीझील स्थित श्री गुरु कार्ष्णि कृपा धाम में आयोजित की गई। नेपाली समाज के वरिष्ठ धर्मात्मा एवं काशी विद्वत परिषद के ब्रज मंडल के सदस्यों ने नेपाली प्रधानमंत्री के इस बयान की निंदा की। डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने कहा के ओली की बोली नहीं है यह चीन की बहकावे की गोली है।
उनका यह बयान किसी भी मूल्य पर स्वीकार्य नहीं है। संजीव कृष्ण ठाकुर ने कहा कि नेपाल से भारत का नाता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीता माता नेपाल की थीं इसीलिए वहां हमारा ननिहाल है। काशी विद्वत परिषद पश्चिमी भारत के प्रभारी कार्ष्णि नागेंद्र महाराज ने कहा नेपाल के प्रधानमंत्री ने यह जो वक्तव्य दिया है वह न तो शास्त्रोक्त है न ही इतिहास में कहीं इसका वर्णन है।
यह मनगढ़ंत बयान है जो कि चीन के कहने पर दिया है। अनुराग कृष्ण शास्त्री व नेपाली कथा व्यास हरी शरण उपाध्याय ने कहा कि राम अयोध्या के हैं। अयोध्या के ही रहेंगे। इस दौरान नेपाली समाज के अध्यक्ष राजकमल ओझा, नारायण दास नागा, वृंदावन दास, विष्णु प्रिया आचार्य, बद्री कृष्ण दास आदि उपस्थित रहे।