मथुरा। विकास खंड बलदेव की ग्राम पंचायत जटौरा में मनरेगा के तहत न तो कोई काम हुआ और न ही कहीं मजदूरों ने पसीना बहाया। जिम्मेदारों ने फर्जी कार्य दिखाकर सरकार को 18 लाख रुपये का चूना लगाया गया। शिकायत पर हुई जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए मुख्य विकास अधिकारी को भेजी गई है।
जटौरा में मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े की शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। जिलाधिकारी के आदेश पर बीडीओ बलदेव नेहा रावत ने सहायक विकास अधिकारी पंचायत और सहायक विकास अधिकारी कृषि के साथ गांव जाकर जांच की। जांच में मनरेगा कार्यों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। मनरेगा के तहत कच्चे कार्य जैसे नाला खुदाई, समतलीकरण, मेड़बंदी, चकमार्ग निर्माण आदि कराया जाता है। इसमें ग्राम पंचायत के पंजीकृत मजदूरों द्वारा काम किया जाता है। भुगतान भी सीधे मजदूरों के खाते में ही होता है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार किसानों के खेतों की मेड़बंदी, चक मार्ग निर्माण समेत अन्य कार्यों के नाम पर प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक ने पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इसमें शिकायतकर्ता भगवान सिंह के खेत की मेड़बंदी के नाम पर 41949 रुपये, संतोष कुमार के खेत की मेड़बंदी के नाम पर 36972 रुपये, रामकिशन के खेत की मेड़बंदी के नाम पर 40053 रुपये, गुड्डू के खेत की मेड़बंदी के नाम पर 39816 रुपये, बबलू के खेत की मेड़बंदी के नाम पर 49770 रुपये और राकेश के खेत की मेड़बंदी दिखाकर मनरेगा से 40053 रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान कर लिया। खेत स्वामियों ने जांच के दौरान इसकी पुष्टि भी की।
वहीं ओमी के खेत से राजेंद्र के खेत तक चकमार्ग के नाम पर 165080 रुपये, दिनेश के खेत से पातीराम के खेत तक चक मार्ग के नाम पर 146102 रुपये, कैलाश चंद के खेत से सुरेश चंद के खेत तक 146064 रुपये और दिनेश के खेत से महेंद्र के खेत तक चक मार्ग कार्य के नाम पर 260700 रुपये का फर्जीवाड़ा साबित हुआ। जांच में ग्रामीणों न बताया कि यह कार्य पूर्व प्रधान द्वारा कराया गया था। इसके अलावा कृष्णा खेल मैदान के समतलीकरण कार्य पर 292790 रुपये निकाले गए। जांच में पता चला कि यह समतलीकरण श्रमिकों ने नहीं बल्कि जेसीबी से कराया गया था, जबकि मनरेगा में जेसीबी से मिट्टी का कार्य कराना प्रतिबंधित है। खेल मैदान के निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री के नाम पर भी 706536 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि जांच टीम को मौके पर काम अधूरा मिला।
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में कुल 1819783 रुपये के गबन की पुष्टि की है। अब जांच रिपोर्ट के अधार पर उच्चाधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
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जब खेत ही नहीं तो कैसे हो गई मेड़बंदी
जटौरा निवासी भगवान सिंह के खेत की मेड़बंदी दिखाकर मनरेगा से भुगतान किया गया था। भगवान सिंह को जब इसका पता चला तो उन्होंने भी ग्रामीणों के साथ शिकायत कर कार्य को फर्जी बताते हुए जांच कराने की मांग की थी। जांच टीम जब गांव पहुंची तो पता चला कि भगवान सिंह के पास कोई खेत है ही नहीं।
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जांच में प्रधान और सचिव ने नहीं किया सहयोग
जांच के लिए बीडीओ ने 29 मार्च 2025 को प्रधान विकास कुमार, सचिव तरुण कुमार और रोजगार सेवक ललित कुमार को 9 अप्रैल को ग्राम सचिवालय पर मनरेगा कार्यों के अभिलेखों के साथ मौजूद रहने के लिए कहा था। लेकिन पत्र के बावजूद भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद 3 मई को जांच के लिए फोन पर सूचित किया गया, लेकिन इसके बाद भी ग्राम प्रधान और सचिव नहीं पहुंचे। रोजगार सेवक और ग्रामीणों की मौजूदगी में शिकायत की जांच की गई।
जिलाधिकारी के आदेश पर जटौरा में मनरेगा कार्यों की जांच की गई थी। जांच में गड़बड़ी मिली है। जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। उच्च स्तर से ही अब कार्रवाई की जाएगी।
-नेहा रावत, बीडीओ बलदेव