शारदीय नवरात्र पर्व के अंतर्गत देवी पूजन के क्रम में बुधवार को अष्टमी के दिन घर-घर कन्या-लांगुरा की पूजा की गई। गुरुवार को नवमी और विजयादशमी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा।
अष्टमी के दिन घर-घर देवी मां के पूजन की विशेष तैयारियां की गई थीं। सुबह से ही देवी मंदिर प्राचीन मसानी स्थित पथवारी, चामुंडा देवी, महाविद्या देवी, चर्चिका देवी, जूरी वाली देवी, बंगलामुखी, कैंट वाली काली देवी मंदिर, रंगेश्वर स्थित काली देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही।
दोपहर बाद घरों में मां भगवती की जोत जलाकर पूजा अर्चना की गई। कन्या-लांगुराओं को भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। शाम को मंदिरों में भव्य फूलबंगला सजाए गए।
बंगले में विराजमान भगवती के दर्शनों को देर रात तक कतार लगी रही। देवी भक्ति के गीतों पर श्रद्धालु नाचते-गाते रहे। गुरुवार को नवमी और विजयादशमी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा। ब्रज समाज हरि संकीर्तन संघ के तत्वाधान में श्रीविद्यापीठ गताश्रम टीले पर भी नवरात्रि की धूम रही।
दिव्य रथ पर विराजमान होंगे प्रभु राम
आर्य समाज तिलकद्वार द्वारा विजयादशमी का पर्व गुरुवार को मनाया जा रहा है। सुबह नौ बजे से 11 बजे तक विशेष यज्ञ, सत्संग का आयोजन होगा। गऊघाट स्थित श्रीराम कनक भवन मंदिर के महंत चंद्रप्रकाश शर्मा के अनुसार गुरुवार को शाम पांच बजे प्रभु श्रीराम दिव्य रथ पर विराजमान होकर दर्शन देंगे।