नंदभवन में निर्जला एकादशी पर काव्य संगोष्ठी में कविता पाठ करते लोग
नंदगांव। निर्जला एकादशी पर नंदीश्वर पहाड़ी स्थित नंदबाबा मंदिर प्रांगण में पारंपरिक काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। नंदगांव और बरसाना के ग्वालों ने एकत्र हो राधा-कृष्ण की महिमा का काव्य रूप में गुणगान किया। मंदिर परिसर में शाम को पद, छंद, सवैया और दोहों की रसधारा बहती रही।
संगोष्ठी की शुरुआत श्रीकृष्ण और बलराम के भव्य फूल बंगले में विराजमान होने के साथ हुई। नंदगांव के लोगों ने बरसाना से आए ग्वालों का पटुका ओढ़ाकर स्वागत किया गया। पारंपरिक पंक्तियों के साथ जब दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे, तो वातावरण में भक्तिभाव के साथ रसिकता भी झलकने लगी।
नंदगांव के ग्वालों ने कृष्ण की बाल लीलाओं और शौर्य का वर्णन करते हुए कहा, बरसाने में असल सुसरार हमारो, न्यारौ नातौ। वहीं बरसाना की ओर से राधाजी की महिमा का बखान करते हुए गाया, राधा हमारी गोरी-गोरी, नवल किशोरी, कन्हैया तेरो कारो है।
दोनों पक्षों के बीच कोई प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि आध्यात्मिक-सांस्कृतिक संवाद था, जो वर्षों से निर्जला एकादशी पर आयोजित होता आ रहा है। काव्य संगोष्ठी में गाए गए छंदों में राधाकृष्ण के प्रेम, तकरार, और मधुर मिलन के भाव प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए।
नंदभवन के गोस्वामी समाज के मुखिया छैलबिहारी गोस्वामी के अनुसार यह परंपरा ब्रज की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है, जो नई पीढ़ी को राधाकृष्ण की लीलाओं और भावनात्मक संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती है।