मथुरा। नगर निगम के अधिकारियों पर तांगा स्टैंड की जमीन बताकर भवन ढहाने के बाद जांच रिपोर्ट गायब करने का आरोप लगा है। पीड़ित ने मामले की आरटीआई द्वारा जानकारी मांगी तो अफसर मनमानी करने लगे और जवाब तक नहीं दे पाए कि ये तांगा स्टैंड की भूमि है या निजी संपत्ति है। जानकारी देने पर एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
हालांकि पीड़ित ने जांच की पत्रावलियां गायब होने का दावा किया है। इसमें एक उच्च अधिकारी की संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। दूसरी तरफ मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।
डैंपियर नगर के रहने वाले निखिल गर्ग ने बताया है कि उन्होंने कृष्णा नगर में 2019 में एक प्लॉट खरीदा था। इसके निर्माण के लिए 2020 में उन्होंने निगम से एनओसी मांगी तो जारी कर दी। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों की शिकायत कर नगर निगम के अधिकारियों ने तांगा स्टैंड की जमीन बताकर बिना नोटिस दिए निर्माणाधीन भवन को ढहा दिया। इसी बीच पीड़ित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से मामले में स्टे ले लिया। फिर उनकी मांग पर तत्कालीन नगर आयुक्त ने अपने स्तर से मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी। अभी तक इसकी जांच लंबित है। उन्होंने 26 अप्रैल को आरटीआई द्वारा निगम के अधिकारियों ने जांच आख्या मांगी तो उन्हें गोलमोल जवाब दिया गया। पीड़ित ने निगम के एक उच्च अधिकारी पर जांच आख्या गायब और सांठगांठ करके मामला निपटाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि वह तांगा स्टैंड की जमीन नहीं है। वह एक निजी प्लॉट है, जबकि निगम ने उसे अपनी भूमि बताकर गलत तरीके से भवन को ध्वस्त कराया है।
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एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे अधिकारी, नहीं मिल रहीं पत्रावलियां
पीड़ित ने दावा किया है कि नगर निगम के अधिकारियों ने जांच आख्या गायब कर दी है। इसलिए निगम के अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं और एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। आरटीआई द्वारा दी गई जानकारी में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने कहा है कि सहायक नगर आयुक्त राकेश त्यागी ने मामले में अभी तक पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इसलिए निगम ने संबंधित मामले में जानकारी देने से इन्कार कर दिया।
वर्जन
प्रकरण संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो पत्राविलयों को दिखवाया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि अब इसकी जांच पूरी क्यों नहीं हुई क्या कारण।
सौरभ सिंह, अपर नगर आयुक्त