जवाहरबाग हिंसा में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को राष्ट्रपति वीरता पदक दिए जाने की मांग उठी है। मुकुल के भाई प्रफुल्ल द्विवेदी ने कहा है कि मेेरे भाई ने जवाहरबाग खाली कराने के लिए अपनी जान दे दी। लेकिन उन्हें कब्जाधारियों के बीच में छोड़कर भागे पुलिस वालों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मथुरा के जवाहरबाग पर रामवृक्ष यादव ने अपने समर्थकों के साथ ढाई साल से कब्जा जमा रखा था। पुलिस और प्रशासन ने कई दफा प्रयास किए मगर कुछ नतीजा नहीं निकला। 2 जून की शाम को करीब पांच बजे तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी अपने साथ पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को लेकर जवाहरबाग खाली कराने पहुंच गए। इसी दौरान जवाहरबाग पर कब्जा जमाए बैठी भीड़ ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पर हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई। इसी दौरान थानाध्यक्ष संतोष कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
शुक्रवार को पुलिस स्मृति दिवस पर मुकुल द्विवेदी के भाई प्रफुल्ल द्विवेदी ने अपने भाई को राष्ट्रपति पदक दिए जाने की मांग उठाई। उनका कहना है कि भाई ने वरदी के लिए अपनी जान दे दी थी। उन्हें अगर महकमा सम्मान दे रहा है तो पदक दिलाया जाए। जो भी पुलिस वाले भाई को भीड़ में छोड़कर भाग गए थे उन सभी को बर्खास्त किया जाए। ताकि आगे किसी अधिकारी के साथ इस प्रकार की घटना न हो सके।