मथुरा। महानगर वासियों को जल्द ही बंदरों के आतंक से मुक्ति मिलने जा रही है। उत्पाती बंदरों को महानगर से चंबल की बीहड़ में छोड़ा जाएगा। इसकी अनुमति वन विभाग ने दे दी है। इस प्रक्रिया में नगर निगम द्वारा फिलहाल दो हजार बंदरों को छोड़ा जाएगा। इसकी अनुमति वेटरनेरी विवि में आयोजित सेमीनार के दौरान संबंधित विभागों के बीच हुई। इसके अलावा यह भी तय किया कि मंकी रेस्क्यू सेंटर पर भी काम किया जाएगा।
महानगर में बंदरों समस्या के कारण अभी तक सैकड़ों जान जा चुकी हैं। समस्या के निराकरण के लिए सोमवार को वेटरनेरी विवि में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, नगर निगम, वन विभाग, प्रशासन तथा वेटरनेरी के विशेषज्ञों की सेमिनार आयोजित की गई। इसमें स्थानीय नागरिक तथा पार्षदों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान वनविभाग के अधिकारियों ने नगर निगम को बंदरों को चंबल में छोड़ने की अनुमति प्रदान की गई।
जानकारी रहे निगम द्वारा वन विभाग से बंदरों को महानगर से बाहर छोड़ने के लिए स्थान पूछा गया था। सेमीनार में ही नगर आयुक्त रविंद्र कुमार मांदड़ ने बंदरों को चंबल छोड़ने की अनुमति पर मुहर लगा दी।
बताया कि पहले दौर में दो हजार बंदरों को चंबल के बीहड़ में छोड़ा जाएगा। इसके अलावा अधिकारियों ने निर्णय लिया कि जल्द ही बंदरों के लिए रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने पूर्व में 25 एकड़ जमीन भी निर्धारित की थी। डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने इस जमीन को जल्द ही उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम ने बंदरों का बंन्ध्याकरण संबंधी प्रस्ताव भी दिया। महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु, ब्रज विकास तीर्थ परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, सीईओ नगेंद्र प्रताप मुख्य रूप से मौजूद रहे।
वन विभाग को मिले सिर्फ 21 हजार 707 बंदर
वन विभाग के सर्वे के मुताबिक जनपद में सिर्फ 21 हजार 707 बंदर हैं। यह जानकारी आधिकारिक रूप से वन विभाग के अधिकारियों ने सेमिनार में दी। वन विभाग द्वारा दी गई इस जानकारी पर मौजूद स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए। उनका मानना है कि पूरे जनपद में 50 हजार से अधिक बंदर हैं।