जानकारी का अभाव कहें या जागरूकता के प्रयासों में कमी, जिले में करीब 2500 परिवार मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत टीकाकरण से परहेज कर रहे हैं। इससे लोगों की सात बीमारियों से सुरक्षा का कवच कमजोर पड़ रहा है और इस आंकड़े ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। स्वास्थ्यकर्मियों की लाख कोशिशों के बाद भी जब ये परिवार टीकाकरण के लिए नहीं राजी हुए तो अब इनकी काउंसिलिंग का जिम्मा अधिकारी चिकित्सकों को दिया गया है।
बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और दो साल तक के शिशुओं को अभियान चलाकर टीके लगाए जा रहे हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य भी दिया गया है। लेकिन, मथुरा में करीब 2500 परिवारों के कारण स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। ये परिवार अपने बच्चों को टीके लगवाने के लिए तैयार ही नहीं हैं।
अभियान में कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों ने इन्हें टीकाकरण के फायदे भी बताए लेकिन ये लोग फिर भी नहीं माने। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार अशिक्षा और अंधविश्वास इसमें सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। इन लोगों में समुदाय विशेष के लोग भी शामिल हैं, जो टीकाकरण के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ गई है और उसने अब टीकाकरण के फायदे बता कर इन परिवारों को मिशन में शामिल करने की जिम्मेदारी चिकित्साधिकारियों को सौंपी है। अब जिले के चिकित्सक घर-घर जाकर परिवारों को जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
मिशन इंद्रधनुष एक नजर में
मिशन इंद्रधनुष में गर्भवती महिला और दो साल तक के शिशुओं को काली खांसी, गलघोंटू, टिटनेस, टीबी, पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस बीमारियों से बचाव के लिए हर माह की सात तारीख से सात दिन तक टीके लगाए जाते हैं। इसमें एक माइक्रो प्लान के जरिए अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया जाता है।
यूनीसेफ से मांगी मदद
जिले में मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण में झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले लोग, मकानों के निर्माण में लगे मजदूर, भट्टा मजदूर सहित हर रोज अपना स्थान बदलने वाले लोगों को शामिल करने के लिए यूनीसेफ से अतिरिक्त सहायकों की मांग की गई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने शासन को भी पत्र लिखा है।
हमारी पूरी कोशिश है कि मिशन इंद्रधनुष में टीकाकरण से जिले की कोई भी गर्भवती महिला और बच्चा न छूटे। अब तक अभियान में शामिल न होने वाले परिवारों की काउंसिलिंग के लिए चिकित्सकों की टीम लगायी गई है।
डा. एके गुप्ता
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, मथुरा