थाना बरसाना के गांव मेहराना में हुए ऑनर किलिंग के मामले की फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही है। शनिवार को देश के इस बहुचर्चित और लगभग 24 साल पुराने मामले में 33 दोषियों को फिर कोर्ट में पेश किया गया। इनमें से आठ को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। 25 लोग आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। दो की सजा के दौरान ही मौत हो चुकी है।
मामला वर्ष 1991 का है। मेहराना की युवती रोशनी गांव के ही युवक बिजेंद्र के साथ चली गई थी। कुछ दिन बाद दोनों गांव में आकर रहने लगे। 27 मार्च को गांव के लोगों ने पंचायत कर युवक-युवती को बरगद के पेड़ से लटकाकर सरेआम फांसी दे दी।
ऑनर किलिंग के इस मामले की सूचना और रिपोर्ट थाना बरसाना में गांव के चौकीदार ने दर्ज कराई। मामले में लंबी सुनवाई के बाद 16 नवंबर 2011 को अपर सत्र न्यायालय-दो ने आठ दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। 27 लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी। दोषी पक्ष ने स्थानीय कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट में अपील की। उच्च न्यायालय ने मामले में युवक और युवती के शव जलाने के बाद एकत्रित की गई अस्थियों की फोरेंसिक रिपोर्ट तलब की और इसके सत्यापन के आदेश दिए।
इस पर अपर सत्र न्यायालय-दो में फोरेंसिक रिपोर्ट के सत्यापन की कार्यवाही चल रही है। शुक्रवार को इस मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला के चिकित्सक को पेश किया गया था। शनिवार को सजा पाए 33 लोगों की पेशी हुई।
फांसी की सजा पाने वाले
तेज सिंह, बच्चू, तुलसीराम, कमल सिंह, राम सिंह, रमन, करन और सिर्रो।
आजीवन कारावास
धन्नी, धर्मवीर, शिवचरन, सिंहराम, बल्लीराम, महेंद्र, धरम, निरतो, गोपी, गिर्राज पुत्र गोविंदा, मन्नी, गिर्राज पुत्र कमर, काशी, चतर सिंह, हरचंद्र, प्रीतम, गंगाराम, हरी, लाल सिंह, मंगतू, दयाराम, बाटों, श्रीचंद्र, दीपी और जीवन।