फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेबस आंखों से बरसते उम्मीदों के आंसू

Fri, 21 Aug 2015 10:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
विज्ञापन
विज्ञापन
डेढ़ दशक लंबी बदहाली से जूझने के बाद अब मुआवजे की बात सुनते ही किसानों की आंखों से खुशी के आंसू बरस पड़ते हैं। हाईकोर्ट के मुआवजा देने के आदेश के बाद उन्हें लगने लगा है कि उनकी दुश्वारियां अब खत्म होने जा रही हैं।
विज्ञापन


एक वक्त था जब गोकुल बैराज के आसपास के गांवों में हर तरफ खुशहाली थी। सब्जी की फसल ने यहां के किसानों को मालामाल कर दिया था, लेकिन गोकुल बैराज ने इन किसानों को सड़क पर खड़ा कर दिया। जमीन के अभाव में कोई बेलदार बन गया, तो कोई रिक्शा चालक।

आज हालत ये है कि इन गांवों के अनेक परिवारों को दो वक्त की रोटी जुटाना कठिन है। कोई बेटी की शादी नहीं कर सका तो कोई बेटों को पढ़ा नहीं सका। यह स्थितियां डेढ़ दशक से बनी हुई हैं। अफसरों की लापरवाही ने किसानों को बर्बाद कर दिया।
विज्ञापन


अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने किसानों की आंखों में उम्मीदों के सुनहरे सपने जगा दिए हैं। 150 रुपये की मजदूरी करने वाले चार बच्चों के पिता महावीर बेहद खुश हैं। रोते हुए 55 वर्षीय बिर्जा कहते हैं कि वह अब अपनी बेटी की शादी कर सकेंगे। कैलाशी भी कुछ ऐसे ही तैयारियों का तानाबाना मन में तैयार कर रहे हैं। ताराचंद्र रोजगार के लिए साधन जुटाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें