महाविद्या मैदान में सोमवार को मेघनाद वध और सुलोचना सती लीला का मंचन हुआ। दर्शकों ने भगवान राम के जयकारे लगाए।
लीला मंचन के दौरान लक्ष्मण अपनी मूर्छित अवस्था से बाहर आ जाते हैं। मेघनाद खुद को अमर करने के लिए देवी की पूजा और यज्ञ करने के लिए गुप्त स्थान पर चला जाता है। विभीषण प्रभु श्रीराम से कहते हैं कि अगर मेघनाद पूजा में सफल हो गया तो उसे कोई भी मार नहीं सकेगा।
प्रभु श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण, हनुमानजी, सुग्रीव और वानर दल को भेजते हैं। हनुमानजी पूजा भंग कर देते हैं और फिर मेघनाद व लक्ष्मण का युद्ध होता है। लक्ष्मण मेघनाद का वध करते हैं और उसका हाथ पत्नी सुलोचना के पास पहुंचता है। सिर को श्रीराम की सेना अपने साथ ले आती है।
सुलोचना राम दल में जाती है और कहती है कि मैं परम सती हूं तो यह कटा सिर हंसने लगे तभी मेघनाद का कटा सिर हंसने लगा। यह देखकर सभी अचंभित रह गए। इसके बाद सुलोचना अपने पति के शव के साथ चिता में सती हो गई। हनुमानजी रावण के पुत्र नारांतक का भी वध कर देते हैं।
यह लीला देखकर सभी श्रद्धालु हर्षित हो गए। मीडिया प्रभारी विपुल पारिक के अनुसार 11 अक्तूबर को अहिरावण और रावण वध की लीला के साथ विजयादशमी दशहरा का मेला आयोजन रामलीला मैदान में भव्य आतिशबाजी किया जाएगा।