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‘संत ही दिखा सकते हैं भटकों को रास्ता’

Tue, 01 Dec 2015 07:24 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
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कोकिलावन धाम में मंगलवार को संत रामेश्वरदास की पुण्यतिथि पर संत सम्मेलन में सद्गुरु और भारतीय संस्कृति पर विमर्श किया गया। कोकिलावन धाम के श्रीमहंत प्रेमदास महाराज ने कहा है कि सद्गुरु आकाश के समान हैं और गुरु आज्ञा में रहने वाले शिष्य बादल के समान।
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महंत मिश्रीदास, चैतन्यदास महाराज ने कहा कि उन्हें लोगों को सद्मार्ग पर ले जाने का कार्य करना चाहिए। केवल संत ही ये रास्ता दिखा सकते हैं। बालकिशन दास, खडेश्वरीदास, सुंदर दास ने भारत में पाश्चात्य सभ्यता बढ़ने के लिए सभी को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि अभिभावक पाश्चात्य संस्कार देते समय अच्छा महसूस करते हैं, जबकि ये गलत है।

मोहनदास, सेवा दास, भक्तमाली ने कहा कि केवल संत ही भटकों को रास्ता दिखा सकते हैं। मेरठ के महेन्द्र दास ने कहा कि संत सम्मेलन के दौरान ही सत्य का प्रचार नहीं करते बल्कि सत्य के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
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पूर्व मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि सरकार को पूरे देश में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। कोसी की पशु पैठ में 25 वर्षों से गोवंश की ब्रिकी नहीं होती। ये भाईचारे की मिसाल है।

भगवानदास, वृन्दावनदास, प्राणकिशनदास, राधवदास, जानकीदास आदि ने भी विचार व्यक्त किए। प्रीतम सिंह नंदलाल, उदय सिंह, गुलाव सिंह, बिजेन्द्र सिंह, गोपी मुकद्म, रूपचंद मुनीम, धर्मचंद, देवकीनंदन कोतवाल सहित गठौना और लोहकना पाल की सरदारी मौजूद रही।
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