मथुरा। 15 वर्ष की किशोरी को पहले झारखंड से दिल्ली लाया गया। वहां से उसे आगरा की एक कोठी में भेज दिया गया। जहां पर परेशान होकर किशोरी भाग निकली और मथुरा जंक्शन पहुंच गई। करीब ढाई वर्ष तक किशोरी को उसकी इच्छा के विरुद्घ रखा गया। घर जाने के इच्छुक किशोरी के परिजन को खोजने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, सादाबाद के एक मंदिर में रह रही किशोरी को भी रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन ने पूछताछ कर नारी शरणालय भेज दिया है।
झारखंड के कोटा जिला निवासी किशोरी को ढाई वर्ष पूर्व अच्छी नौकरी का सपना दिखाकर दिल्ली ले आया गया। जहां पर वह करीब एक वर्ष रही। जिसके बाद उसे आगरा की एक कोठी में काम करने के लिए भेज दिया गया। इस दौरान उसे एक रुपया नहीं मिला। शोषण से परेशान किशोरी भागने में कामयाब हो गई। भागकर मथुरा जंक्शन पर किशोरी भटक रही थी कि रेलवे चाइल्ड लाइन की नजर पड़ गई। पूछताछ की गई तो सब कुछ बता दिया। फिलहाल रेलवे चाइल्ड लाइन के माध्यम से बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।
जबकि एक अन्य मामले में एक 15 वर्षीय अन्य किशोरी को भी रेलवे चाइल्ड लाइन ने नारी शरणालय भेज दिया। किशोरी ने बताया कि उसके माता-पिता बचपन में ही गुजर गए। वह अब मामा के पास रहती थी। मामा की मृत्यु के बाद वह खुद चलकर मथुरा आ गई। यहां पर एक मंदिर में रहने लगी। दो दिन पूर्व वह वहां से निकलकर जंक्शन पर आ गई। वह दिल्ली जाना चाहती थी। रेलवे चाइल्ड लाइन के कोऑर्डिनेटर मोहम्मद सईद ने बताया कि फिलहाल दोनों को नारी शरणालय मथुरा भेजा गया है।