बुद्ध विहार के एआरएम योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि परिचालक की संविदा समाप्त कर बस का अनुबंध खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा चालक बस स्वामी भगवान सिंह निवासी गुरु रामदास नगर का प्राइवेट था। बस जलने के मामले की पूरी रिपोर्ट एमडी को सौंप दी गई है।
नहीं चढ़ सके चालक-परिचालक पुलिस के हत्थे
चालक तेजवीर और परिचालक सुरेश की तलाश में कोतवाली पुलिस दबिश दे रही है, लेकिन बृहस्पतिवार को भी दोनों पुलिस की पकड़ से दूर रहे। चार दिन बीतने के बाद भी पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़ नहीं सकी है। कोतवाल विजय कुमार सिंह का कहना है कि चालक और परिचालक को पुलिस की टीम तलाश रही है। जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
खटारा बसों में जान जोखिम में डालकर सवारियां कर रहीं सफर
पुराने बस अड्डे पर बुद्ध विहार डिपो की अनुबंधित बस में लगी आग की घटना को चार दिन बीत गए, पर अभी तक सिस्टम में कोई भी बदलाव देखने को नहीं मिला। न तो खटारा बसों में सवारियों को ढोना रुका, न ही पार्सल व सामान ले जाने पर पाबंदी लगी। परिवहन निगम के अफसरों की लापरवाही फिर कोई बड़ी वारदात को न्योता देती दिख रही है।
बृहस्पतिवार को पुराने बस अड्डे पर व्यवस्था को परखा तो हालात हैरान करने वाले मिले। यहां पर हाथरस डिपो की बस में ठूंस-ठूंसकर सवारियां भरी हुईं थीं। इसके बाद इस बस को धक्का मारकर स्टार्ट करके चालक आगे ले जा सका। इन खटारों बसों को हटाने की बजाए, उनसे लगातार सवारियां ढोयी जा रही हैं। सवारियों की जिंदगी का परिवहन निगम के अफसरों को कतई भी चिंता नहीं। जान जोखिम में डालकर सवारियां सफर कर रही हैं। इसके अलावा इन बसों में पार्सल भी बेखौफ होकर ले जाया जा रहा था। पुराने बस अड्डे पर परिवहन निगम के अफसर भी इन पार्सलों को बस में रखवाने के लिए रोकते हुए नहीं दिखे। यह अफसर केवल अपनी बातों में मशगूल दिखे। लगातार बरती जा रही परिवहन निगम के अफसरों की लापरवाही कोई बड़ी वारदात को न्योता दे रही है।
मथुरा डिपो के एआरएम नरेश चंद गुप्ता ने बताया कि बस अड्डे पर कर्मचारियों का सतर्क कर दिया गया है। कोई भी पार्सल बिना चेक किए नहीं ले जाया जाएगा। बस अड्डे की हालत में जल्द सुधार किया जाएगा।
बस अड्डों पर नहीं कोई सुविधा, यात्री हो रहे परेशान
चाहे पुराना बस अड्डा हो या फिर अंतरराज्यीय नया बस अड्डा। यात्रियों के लिए सुविधा में सुधार नहीं दिखा। यात्रियों के लिए कुर्सी तक बैठने को नहीं है और न ही पीने को पानी मुहैया तक नहीं है। इसके अलावा गंदगी से गुजरकर बसों में यह सवार होते हैं। परिवहन निगम के अफसरों की लापरवाही का दंश ही यहां आने वाले यात्री झेल रहे हैं।
बस अड्डों की हालत ऐसी है कि यात्री बैठने को तरस जाते हैं। यहां कोई कुर्सी तक नहीं है, जिससे वह आराम से बैठकर बस का इंतजार कर सकें। खास यह भी है कि इन दोनों बस अड्डों पर पीने का पानी भी नहीं मिलता है। कई बार यात्रियों ने इसकी शिकायत परिवहन निगम के अफसरों से की, पर आजतक यह सुविधा उपलब्ध कराने में परिवहन निगम पूरी तरह से लापरवाह दिखा।
2021 में खत्म हो गया था अनुबंध, 2024 तक किया नवीनीकरण
भगवान सिंह निवासी गुरु रामदास नगर का 2016 में 54 सीटर बस का अनुबंध 15 सितंबर तक की अवधि तक बुद्ध विहार डिपो से हुआ था। अवधि समाप्त होने के बाद इस बस का अनुबंध 16 सितंबर 2021 से 15 सितंबर 2024 तक बढ़ा दिया गया। तीन साल के लिए अनुबंध का नवीनीकरण किया गया। अलीगढ़ के आरएम कार्यालय में यह अनुबंध बढ़ाया गया। पुराने बस अड्डे पर 14 फरवरी को लगी आग से तोशीबा कंपनी के जीएम शैलेश उपाध्याय की जिंदा जलकर मौत हो गई।
अफसरों ने अपनी कमियां छुपाईं, स्टेशन प्रभारी पर गिरा दी गाज
आखिरकार परिवहन निगम के अफसरों ने अपनी कमियां छुपाने के लिए पुराने बस अड्डे के प्रभारी प्रेम सिंह पर गाज गिरा दी। सिस्टम को दरकिनार करते हुए इस आगजनी में समय पर न पहुंचने व अन्य जिम्मेदारियों में लापरवाही बताते हुए स्टेशन प्रभारी को निलंबित कर दिया। दो दिन बाद अचानक हुई कार्रवाई से परिवहन निगम के कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया। आखिर स्टेशन प्रभारी की क्या गलती थी। यह दबी जुबान में कर्मचारी कह रहे हैं। केवल अपनी कमियों को छुपाने के लिए स्टेशन प्रभारी को निशाना बनाया गया। सबसे पहले स्टेशन प्रभारी से ही परिवहन निगम के अफसरों ने चालक-परिचालक के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद यह निलंबन की कार्रवाई की है।