मथुरा। संत विजयदास की अस्थियों के कलश रथयात्रा में हरिनाम संकीर्तन करते हुए संतजन व अन्य।
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बरसाना (मथुरा)। पसोपा राजस्थान में कनकांचल पर्वत की रक्षा में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले संत विजयदास की अस्थि कलश रथयात्रा माताजी गोशाला से पसोपा के लिए रवाना हुई। इसमें क्षेत्र में पड़ने वाले प्राचीन कुंडों का जल भी लिया जाएगा।
कस्बा बरसाना में लोगों ने जगह-जगह रथयात्रा पर की पुष्प बरसाए। ज्ञात रहे राजस्थान के प्राचीन पर्वत आदि बद्री एवं कनकांचल पर्वत पर हो रहे अवैध खनन के विरोध में संत विजयदास ने पिछले दिनों राजस्थान के पसोपा में आत्मदाह कर लिया था।
शुक्रवार को ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के सानिध्य में संत विजयदास कि अस्थियां लेकर कलश रथयात्रा मान मंदिर से रवाना हुई। रथयात्रा पर कस्बा बरसाना में जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। यात्रा में पड़ने वाले कुंडों से जल एकत्र किया गया। यात्रा राजस्थान के पसोपा गांव पहुंचेगी। मान मंदिर के सचिव सुनील सिंह ने बताया कि पूज्य बाबा का अंतिम संस्कार माताजी गोशाला में किया गया लेकिन उनकी समाधि पसोपा गांव में ही बनाई जाएगी।
शनिवार को पसोपा गांव में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। अस्थि कलश रथयात्रा के साथ मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह, कीर्तन दास, नारायण दास, फौजी बाबा, शिब्बू, फलहारी बाबा, कन्हैया दास, बड़े नारायण बाबा आदि चल रहे थे।