मथुरा। साल का पहला सूर्यग्रहण 10 जून ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ रहा है। इस दिन शनि जयंती भी है, इसलिए सूर्यग्रहण के साये पर शनिदेव का भी अद्भुत संयोग देखने को मिलेगा। हालांकि यह सूर्यग्रहण भारत के पूर्वोत्तर राज्य और जम्मू-कश्मीर में आंशिक रूप से दिखाई देगा। इसलिए भारत में सूर्यग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा।
वृष राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगने जा रहा यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई दे या न दे लेकिन उसका प्रभाव हर किसी के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में ग्रहण के दौरान जप-तप व दान करना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि शास्त्रों में ग्रहण के अशुभ प्रभाव को खत्म करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। इन उपायों के करने से ना सिर्फ कुंडली में गृह-नक्षत्रों की स्थिति मजबूत होती है बल्कि जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। 148 वर्ष के बाद शनि जयंती के दिन सूर्यग्रहण पड़ रहा है।
सरसों के तेल का दीपक जलाएं
ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन सूर्यग्रहण के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों को याद करते हुए दूध से बनी मिठाई के पांच टुकड़ा रख दें। फिर सात परिक्रमा करें और आसपास मौजूद गरीब व जरूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें। ऐसा करने से सूर्यग्रहण का शुभ फल मिलता है और भाग्य भी उदय होता है।
परेशानियों से मिलेगी मुक्ति
सूर्य-केतु की युति होने पर सूर्यग्रहण के समय तिल, नींबू और पका केला लें और फिर उसको बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद गायत्री मंत्र या फिर महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।