मथुरा। तोशीबा कंपनी के मृतक जीएम शैलेश उपाध्याय फाइल फोटो।
मथुरा। तोशीबा कंपनी के जीएम शैलेश उपाध्यक्ष ने खुद की जान कुर्बान कर दी लेकिन इससे पहले उन्होंने एक-एक करके बस से महिलाओं, बच्चों व यात्रियों को बाहर निकलने का मौका दिया। दुर्भाग्य रहा कि जैसे ही उनके उतरने की बारी आई तो अचानक बस में रखा ज्वलनशील पदार्थ आग का गोला बन पूरी बस को आगोश में लिया।
उन्होंने पीछे वाली खिड़की से निकलने का असफल प्रयास भी किया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पुराने बस अड्डे के आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि जिस वक्त बस के बोनट से आग निकली तो उस समय बस जाने के लिए तैयार खड़ी थी और चालक-परिचालक का इंतजार किया जा रहा था। बस पूरी तरह से खचाखच भरी हुई थी। सीटें फुल होने के साथ यात्री खड़े हुए भी थे, इसमें महिलाएं व बच्चे शामिल थे।
जैसे ही बस के इंजन में आग लगी तो गेट पर खड़े लोग अपना सामान लेकर तेजी से उतरने लगे। सीट पर बैठे लोग भी खड़े हो गए और शोर मचाने लगे कि जल्दी नीचे उतरो। लोगों ने बताया कि शुरूआत में बस से नीचे उतारने में लोगों ने मदद भी की। कई महिलाओं ने बच्चों को गेट से नीचे उतारा। कुछ बच्चों को तो लोगों ने खिड़की से सीसे से नीचे उतार लिया। बताते हैं कि शैलेश पीछे वाली सीट पर बैठे थे। उन्होंने खड़े होकर लोगों को बाहर निकलने का मौका दिया।
विशेषकर बच्चों व महिलाओं के लिए वह आवाज दे रहे थे कि इन्हें रास्ता दो। यहां तक कि महिलाओं को बच्चों को नीचे उतारने में उन्होंने मदद भी की। सभी यात्रियों के नीचे उतरने के बाद वह भी गेट पर पहुंचे लेकिन दुर्भाग्यवश तभी बोनट के पास रखा केमिकल आग का गोला बन गया और पूरे गेट को आग की लपटों से घेर लिया। साथ ही बस में तेजी से धुआं भी भर गया। उन्होंने बस के पीछे जाकर सीसे से निकलने का प्रयास भी किया लेकिन सफल नहीं हो सके।
सामने दुकान पर बैठे राजेश ने बताया कि बस के शीशे से एक शख्स को उतरते देखा था। लेकिन आग इतनी तेज थी कि उनको बचाने के लिए कोई पास नहीं पहुंच सका। बस आग का गोला बनने से पहले चंद सेकेंड का समय मिल गया होता तो शैलेश की जान बच सकती थी लेकिन खुद की जान जाने से पहले उन्होंने कई जानें बचाई हैं। उनके बेटे शशांक और शौरभ ने कहा कि पापा परोपकारी थे और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे।