मथुरा। द्रुति गति से हो रही जांच में एक दफा फिर से अधिकतर विद्यालयों की बिल्डिंग गायब मिल रही हैं। छात्र नदारद हैं। कुछ विद्यालय संचालक अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। बृहस्पतिवार तक पूरी होने वाली जांच में अधिकारी लगभग 150 विद्यालयों तक पहुंच गए। अब उन्हें एक दिन में शेष विद्यालयों की मौके की रिपोर्ट डीएम को देनी होगी।
बता दें कि मथुरा में करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का घोटाला हुआ है। इसकी शासन स्तर से जांच कराई जा रही है। शासन स्तर के दबाव के चलते डीएम नवनीत सिंह चहल ने एक दफा 17 से 22 जुलाई तक मात्र चार दिन में जांच पूरी करने का लक्ष्य तहसीलवार बनाई जांच समितियों को सौंप दिया है। पिछले जांचकर्ता एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इन विद्यालय संचालकों के पास अपनी बिल्डिंग तक नहीं हैं। अधिकारीगण कुल 314 विद्यालयों में से 150 विद्यालयों तक पहुंच चुके हैं।
फिलहाल वह जांच के बारे में कुछ नहीं बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि जांच में फिर से विद्यालयों की बड़ी कमियां उजागर हो रही हैं। एसडीएम सदर प्रशांत नागर ने बताया कि उन्हें मांट के करीब 42 विद्यालयों की जिम्मेदारी मिली है और वह इनमें से करीब 15 विद्यालयों की जांच कर चुके हैं । 22 को उन्हें सभी विद्यालयों की जांच पूरी करके देनी होगी।
यह अधिकारी कर रहे हैं जांच
सदर तहसील में सिटी मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी छाता और डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र कुमार यादव, महावन तहसील के लिए उपजिलाधिकारी मांट, डिप्टी कलेक्टर सुरेश, तहसील गोवर्धन के लिए उपजिलाधिकारी मांट व डिप्टी कलेक्टर ओपी तिवारी, तहसील मांट के लिए उपजिलाधिकारी सदर तथा डिप्टी कलेक्टर अजय कुमार, तहसील छाता के शिक्षण संस्थानों के लिए उपजिलाधिकारी गोवर्धन डिप्टी कलेक्टर संदीप वर्मा जांच कर रहे हैं।