फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्टेशन से पेड़ा-पेठा की मिठास सात साल से गुम

Tue, 02 Jun 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां के रेलवे स्टेशन से मथुरा का पेड़ा और आगरा का पेठा गायब है। सात साल से 17 हजार रोजाना रेलवे को घाटा देकर भी रेलवे अफसर बेफिक्र हैं। इस समयावधि में रेलवे के जीएम से लेकर अन्य अधिकारियों में से किसी ने मथुरा स्टेशन पर पेड़ा और पेठा बिक्री शुरू कराने में रुचि नहीं दिखाई।
विज्ञापन

 
श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा का पेड़ा मशहूर है। यहां तक कि वृंदावन के प्रमुख बिहारीजी मंदिर में प्रतिदिन सवा मन पेड़े का भोग लगता है और  श्रीनाथद्वारा के मंदिर के लिए मथुरा से रोज पेड़ा भोग प्रसाद को जाता है। यात्री श्रद्धालु मथुरा से पेड़े को प्रसाद के रूप में घर ले जाते हैं।

पेडे़ की मिठास में आगरा का पेठा भी साथ देता है। रेलवे सूत्रों के अनुसार वर्ष 2008 तक रेलवे की आईआरसीटीसी पेड़ा और पेठे के बिक्री के ठेके हर दो वर्ष के लिए उठाती थी। इससे रेलवे को रोजाना 17 हजार रुपये राजस्व मिलता था। 28 फरवरी 2008 के बाद से यहां के रेलवे स्टेशन पर पेड़े और पेठे की बिक्री बंद है। इसकी शिकायत समय-समय पर रेलवे के जीएम से लेकर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से की गई लेकिन किसी अधिकारी ने इसमें रूचि नहीं दिखाई। अब यह व्यवस्था डीआरएम के हाथों में है।
विज्ञापन


सूजी बूरे के पेड़े की अवैध बिक्र ी
मथुरा। कुछ कर्मियों की सेटिंग के चलते मथुरा जंक्शन और यहां रुकने वाली ट्रेनों में बेहद घटिया क्वालिटी के पेड़े की अवैध बिक्री जारी है। सूजी और बूरे के पेड़े को सांठगांठ पर ठेकेदार धड़ल्ले से बेच रहे हैं।
 
महीनेदारी के चलते सात साल से अटका पेड़ा
मथुरा। सात साल से मथुरा के पेड़ा और आगरा के पेठा से वंचित मथुरा जंक्शन के मामले में रेलवे सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों से जो सेवा मांगी जाती है वह पूरी नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार समय-समय पर निरीक्षण में सेवा भगत, आरपीएफ, जीआरपी, स्टेशन कर्मियों को समझने के अलावा महीने पर अलग से व्यवस्था करने की शर्तें इतनी कठिन हो चुकी हैं कि पेड़े और पेठे के ठेकेदार ऊपरी खर्चे को उठाने से मना कर देते हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें