मथुरा। गुलाबी पोशाक एवं श्वेत मोती की नूतन आभूषण धारण कर दर्शन देते ठाकुर राधा रमण लाल।
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वृंदावन (मथुरा)। रूनझुन नुपुर बाजैं रैं, अमार गौरांगो सुंदर नाचै रे... गाले वनमाला डोले रे.. अमार गौरांग सुंदर नाचे... संकीर्तन माधे माधे....नाचे नाचे रे गौरा.... आदि हरिनाम संकीर्तन की गूंज से श्रीराधारमण प्रांगण झूम उठा।
श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन पर आनंदित व भावविभोर होकर थिरक रहे थे। मानो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि श्रीवास आंगन में साक्षात श्रीश्रीगौराचांद (चैतन्य महाप्रभु) अपने प्रिय पार्षदों, परिकरों एवं वैष्णवजनों सहित बेसुध होकर हरिनाम संकीर्तन कर नृत्य कर रहे हों। यह समा गौड़ीय वैष्णव संगीताचार्य मलय दास की संकीर्तन मंडली द्वारा बांधा गया। उनके साथ मृदंग पर चंदनदास एवं माधवदास, मंजीरे पर गोपीनाथदास एवं निमाई दास द्वारा हरिनाम संकीर्तन किया गया।
ठा. श्री राधारमण मंदिर में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में ठा. राधारमण लाल ने शांत भक्ति रस निकुंज में विराजकर भक्तों को दर्शन दिए। निकुंज में ठा. राधारमण लाल एवं प्रियाजू ने गुलाबी पोशाक धारण की एवं श्वेत मोती के नूतन आभूषण भी धारण किए, संध्या आरती पर संदर्शन खुलने के अवसर पर अपलक नेत्रों से श्रीजी की छवि को भक्त निहार रहे थे।
शांत भक्ति रस का वर्णन करते हुए आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि जब भक्त की सेवा करने के लिए तत्पर होते हैं, तो भक्तों के हृदय में विभिन्न प्रकार के भाव उदय होते हैं, जो साधक विषय वृत्तियों पर नियंत्रण करके और हृदय चित्त को शांत भाव में ले आते हैं, तब शांति भक्ति रस का उदय होता है। इस अवसर पर संत वेणुगोपाल गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी, सुवर्ण गोस्वामी आदि उपस्थित थे।