मथुरा। जिले में पुलिस और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यहां अब तक 40 घटनाएं दर्ज होने के साथ जनपद प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। इनमें अकेले छाता तहसील में ही 26 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
एनजीटी के निर्देशों पर सरकार ने धान की पराली जलाने पर प्रतिबंधित लगा रखा है। आदेश के अनुपालन के लिए पुलिस, प्रशासन, पंचायतराज, राजस्व और कृषि विभाग की 80 संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। बावजूद इसके पराली दहन का सिलसिला थम नहीं रहा है।
इस माह की एक तारीख से अब तक केवल 10 दिन में ही पराली जलाने की 40 घटनाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गईं हैं। जिले में अकेले छाता तहसील में सर्वाधिक 26 घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं मांट और गोवर्धन में 6-6, सदर में 2 घटनाएं सामने आई हैं जबकि महावन तहसील में कोई घटना दर्ज नहीं हुई है।
अलीगढ़ दूसरे स्थान पर
सैटेलाइट से कृषि विभाग को मिली जानकारी के अनुसार पराली दहन में प्रदेश में अलीगढ़ दूसरे और गौतमबुद्ध नगर तीसरे स्थान पर है। पांच घटनाओं के साथ एटा चौथे और चार-चार घटनाओं के साथ झांसी और हापुड़ जनपद पांचवें स्थान पर हैं।
अब तक पराली जलाने की 40 घटनाओं के साथ जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहां छाता क्षेत्र के किसान इसका सर्वाधिक उल्लंघन कर रहे हैं। अब तक 13 किसानों पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। पुनरावृत्ति करने वाले किसानों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-आवेश कुमार सिंह, प्रभारी उप निदेशक, कृषि