नव संवत्सर पर्व हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है। इस दिन ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी का विशेष शृंगार हुआ, साथ ही वृंदावन के अन्य मंदिरों में भी धार्मिक आयोजन हुए।
नव संवत्सर पर्व पर वृंदावन के मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज के श्रीचरणों में नव संवत्सर मनाने पहुंचे।
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भक्तों ने अपने आराध्य के दर्शन किए और हिंदू नववर्ष की शुरुआत की। वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य ठाकुरजी को आकर्षक नवीन पोशाक धारण कराने के साथ माखन, मिश्री व नीम की कोपलों का भोग भी लगाया गया।
नव संवत्सर पर ठाकुरजी को माखन, मिश्री एवं नीम की कोपल प्रसाद के रूप में अर्पित कर भक्तों को प्रसाद बांटा गया। मंदिर कुल पुरोहित द्वारा ठाकुरजी के समक्ष नव संवत्सर वाचन कर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी की राशि का फल सुनाया।
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इसके बाद स्वामी हरिदास की राशि पढ़कर सुनाई गई। वहीं, ठाकुर राधावल्लभलाल ने नव संवत्सर पर नवीन वस्त्र धारणकर भक्तों को दर्शन दिए। राजभोग में ठाकुरजी को विशेष भोग निवेदित किया गया। वहीं ठाकुरजी के समक्ष समाज गायन के साथ ही नव संवत्सर से जुड़े पदों का गायन हुआ। इधर, राधादामोदर, राधारमण, रंगजी मंदिर, राधाबाग स्थित मां कात्यायनी और प्रेम मंदिर में दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। दर्शनों का क्रम देर सायं तक जारी रहा।