फतेहपुर सीकरी निवासी युवक रामू की मौत में मथुरा पुलिस बुरी तरह फंस रही है। सारे थाने खंगाल मारे लेकिन उसके खिलाफ कहीं कोई आपराधिक मामला नहीं मिला है। जबकि अधिकारी उसे बड़ा बदमाश साबित करने लगे थे। बताया जाता है कि गोली लगने के बाद रामू काफी देर तक मौके पर ही तड़पता रहा। जब अफसर पहुंचे तब उसे अस्पताल भेजा गया। उस वक्त तो घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारी भी गोली चलाने वाले सिपाही की पीठ थपथपा रहे थे।
पुलिस की गोली से मारे गए युवक रामू (23) पुत्र प्रेम सिंह के परिवार वाले कह रहे हैं कि उनके बेटे को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मारा है। रामू पर कभी कोई मुकदमा नहीं हुआ। वह तो बड़ा शरीफ था। किसी के साथ लड़ाई-झगड़ा भी कभी नहीं करता था। यह लोग मानवाधिकार से लेकर अदालत तक का दरवाजा खटखटाने की बात कर रहे हैं। इनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उनके बेटे को मारा गया है।
वहीं मामला तूल पकड़ने पर पुलिस अधिकारी भी बैकफुट पर आ गए हैं। अब तो यहां तक कहने लगे हैं कि गोली सिपाही ने मारी या फिर भीड़ में से किसी ने कुछ पता नहीं चल रहा है। जबकि शुरुआत में सिपाही का नाम लिया जा रहा था। कहा जा रहा था कि सिपाही ने बड़ी बहादुरी का परिचय दिया है। लोगों ने भी उसके हौसले को सराहा। जबकि वहां एक आदमी यह कहने वाला नहीं है कि यह अच्छा हुआ।
यहां तक कि पुलिस जिस व्यापारी झामनदास से लूट की कोशिश की बात कर रही है उनका तो कहना है कि बदमाश पर किसने गोली चलाई उन्हें पता नहीं है। पुलिस ये भी कह रही है कि युवक ने पुलिस पार्टी पर फायर किया था। लेकिन इसकी हामी भी कोई नहीं भर रहा।