मथुरा (वृंदावन)। टीलों पर बसे पुरातत्व महत्व के मथुरा के प्रमुख स्थलों पर माफिया कब्जा कर रहे हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि पुलिस को तहरीर दिए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जिसके चलते माफिया के हौसले बुलंद हैं और दिन पर दिन इन स्थलों या इनके आसपास अतिक्रमण की बाढ़ आ रही है।
वृंदावन के चार प्रमुख मंदिर मदन मोहन देव जी, जुगल किशोर जी, राधा बल्लभदेव जी और गोविंद देव जी मंदिर हो या फिर मथुरा और वृंदावन के अन्य पुरातत्व महत्व के अन्य धार्मिक स्थल हों। पुरातत्व विभाग को इन पुरातत्व महत्व के स्थलों की संरक्षण की जिम्मेदारी है लेकिन विभाग इनका संरक्षण नहीं कर पा रहा है।
मथुरा-वृंदावन में कुल 42 पुरातत्व महत्व के स्थल हैं। इनमें से कुछ स्थलों को छोड़ दें तो अधिकांशत स्थलों पर माफिया अतिक्रमण कर रहे हैं। जिससे न केवल इनके मूल स्वरूप पर खतरा मंडरा रहा है बल्कि कई स्थानों पर पुरातत्व महत्व की धरोहरों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनके द्वारा माफिया के खिलाफ दी गई तहरीर को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है। संरक्षण सहायक सतीश कुमार ने बताया कि दर्जनों स्थानों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ तहरीर दी है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
हाथी टीला निगम की संपत्ति, संरक्षण की जिम्मेदारी हमारी
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से चंद कदमों की दूरी पर स्थित पुरातत्व महत्व के हाथी टीला के संबंध में भी संरक्षण सहायक सतीश कुमार ने कोतवाली के अलावा एसएसपी व डीएम कार्यालय में पहुंचकर तहरीर रिसीव तक कराई लेकिन कोतवाली पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। हाथी टीला मूल रूप से नगर निगम की संपत्ति है, लेकिन पुरातत्व विभाग के पास संरक्षण की जिम्मेदारी है।