मथुरा। लाजपतनगर स्थित एक स्कूल को 2003 में मान्यता मिली थी लेकिन वहां स्कूल नहीं बनाया गया। बल्कि मकान बनाकर निवास बना लिया गया। जबकि उक्त जमीन पर सिर्फ शिक्षण कार्य ही हो सकता है। मथुरा-वृंदावन प्राधिकरण इसे गिराने के आदेश भी कर चुका है।
एक शिकायत सीएम के पोर्टल पर की गई है। कहा गया है कि स्कूल की जमीन पर आवास होने के कारण आसपास के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। करीब 20 साल से स्कूल की जमीन पर मकान बनाकर आरोपी रह रहे हैं। प्राधिकरण से कोई एनओसी नहीं ली गई है। जबकि जिस वक्त प्रॉपर्टी डीलर ने भूखंड खरीदा था तो इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि यह सिर्फ स्कूल की जमीन है। इतना ही नहीं खुद परिवार के साथ रह रहा है और किराएदार भी बसा लिए हैं।
जब आरटीआई से पूछा गया कि स्कूल कौन संचालित कर रहा है, कितने बच्चे हैं और कौन पढ़ाता है तो जवाब में प्रॉपर्टी डीलर ने अपने ही पूरे परिवार के नाम दे दिए। इतना ही नहीं न्यायालय मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के सक्षम अधिकारी ने आरोपी को नोटिस भेजकर 450 वर्ग मीटर के भूखंड पर बेसमेंट, भूतल व प्रथम तल के बारे में 28 फरवरी को जवाब मांगा था, उसका जवाब अभी तक नहीं दिया गया।
खंड शिक्षा अधिकारी की तरफ से भी 31 मार्च को स्कूल प्रबंधक को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया कि पिछले दिनों स्कूल का निरीक्षण किया। वहां न तो स्कूल मिला, न ही बच्चे और न ही शिक्षक। सीएम से मांग की है इसकी जांच कराकर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।