बरसाना/नंदगांव (मथुरा)। वृषभानु भवन से रंगीली एवं गोपाल सखी 10 मार्च को नंदभवन में होली का न्योता देने जाएगी।। होली के निमंत्रण की स्वीकृति लेकर नंदगांव से शाम को पंडा वृषभानु भवन बरसाना आएगा। न्योता स्वीकार करने की खुशी में लाडली भवन में पांडे लीला के साथ लड्डू होली होगी।
वृषभानु भवन से सखी बृहस्पतिवार को सुबह होली का न्योता देने के लिए नंदगांव जाएंगी। दोनों सखी पिछले आठ वर्ष से होली का न्योता देने जा रही हैं। रंगीली सखी अपने साथ एक हांडी में गुलाल, पान बीड़ा, खीरसा, इत्र, फुलेल आदि भोग प्रसाद लेकर नंदभवन में जाकर माखन चोर कन्हैया से राधा का न्योता देती हैं। पूरे ग्वाल-बाल मंडली के साथ कहते हैं कि बरसाने में होली खेलने को बुलायौ है।
बरसाने से होली का न्योता पाकर कृष्ण व उसके सखा खुशी के मारे पागल हो जाते हैं। इसके बाद नंदभवन से एक पांडा कृष्ण का संदेश लेकर वृषभानु भवन में आता है और सखियों से कहता है कि नंदलाल अपने सखाओं के साथ होली खेलने के लिए कल बरसाने आ रहे हैं। कन्हैया के संदेश को पाकर सखियां पांडे को लड्डू खिलाती हैं। पांडा लड्डू खाकर खुशी से पागल हो जाता है और खुद खाता तथा उन लड्डुओं को श्रद्धालुओं की ओर लुटाता है। इसी दौरान मंदिर परिसर में लड्डुआें की वर्षा के साथ अबीर-गुलाल की होली शुरू हो जाती है। इस दौरान मंदिर में कई क्विंटल बूंदी के लड्डू लुटाए जाते हैं। कारीगर इन लड्डुओं को बनाने में लगे हैं।
अब नहीं आता नंदगांव का पांडा
परंपरा के अनुसार कान्हा की ओर से होली की स्वीकृति का संदेश बरसाना पहुंचाने वाला पांडा आज से 100 वर्ष पहले तक नंदगांव से बरसाना पहुंचता था। अब नंदगांव से काई पांडा बरसाना नहीं पहुंचता है। अब इस लीला को बरसाने के ही गोस्वामी सेवायत करते आ रहे हैं।
बुजुर्गों के अनुसार एक बार मध्य प्रदेश के रीवा रियासत के महाराजा लड्डू होली देखने के लिए आए थे। इस दौरान मंदिर परिसर में पांडे का नृत्य देख कर महाराजा इतने भावविभोर हो गए कि उन्होंने अपने समस्त राजसी जेवर पांडा को भेंट कर दिए, लेकिन इतने पर भी राजा का मन नहीं भरा और उन्होंने सोने के इतने सिक्के पांडा को भेंट किए कि पांडा उन्हें उठा तक नहीं सका। अगली बार फिर से आने का प्रण कर राजा लौट गए।
बरसाना मंदिर का पुजारी इस धन वर्षा को देख अगले वर्ष से उसने नंदगांव के पांडा को बुलाने के बजाय स्वयं पांडा का वेश धर नाचना शुरू कर दिया। पुजारी के दुर्भाग्य से रीवा के महाराजा फिर होली देखने नहीं आए। नंदगांव से पांडा आने की परंपरा समाप्त हो गई। तब से श्रीजी मंदिर में सेवायत ही पांडा का वेश बनाकर इस लीला को करते आ रहे हैं।
लठामार होली की द्वितीय चौपाई निकलेगी आज
प्रसिद्ध लठामार होली की द्वितीय चौपाई बृहस्पतिवार को लड्डू होली के दिन शाम को धूमधाम से निकाली जाएगी। चौपाई राधारानी मंदिर से रंगेश्वर महादेव तक निकाली जाएगी।
आज लड्डू होली व कल लठामार होली पर शीश महल से दर्शन देंगी राधारानी
बृहस्पतिवार को प्रसिद्ध लड्डू व शुक्रवार को लठामार होली के दिन रासेश्वरी राधारानी अपने प्रियतम के साथ गर्भगृह से बाहर जगमोहन में स्थित शीशमहल में विराजमान होकर भक्तों पर कृपा का सागर लुटाएंगी।