मथुरा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और रालोद आमने-सामने हो गई हैं। अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर दोनों में से किसी एक का जिला पंचायत सदस्य काबिज होगा। शनिवार को भाजपा के किशन सिंह तथा रालोद प्रत्याशी राजेंद्र सिंह सिकरवार ने नामांकन किया। दोनों के ही नामांकन फार्म ठीक मिले। अब 33 जिला पंचायत सदस्यों में से एक को अपने साथ 17 सदस्यों का बहुमत साबित करना होगा। इसके लिए तीन जुलाई को मतदान होगा।
बसपा के 13 जिला पंचायत सदस्य होने के बाद भी पार्टी ने किसी को भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर लड़ने के लिए हरी झंडी नहीं दी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर किस पार्टी से कौन-कौन लड़ेगा, इसके लिए दो दिन से कयास लगाए जा रहे थे। भाजपा ने किशन सिंह चौधरी व रालोद ने राजेंद्र सिंह सिकरवार को उम्मीदवारी के लिए उतारा। राजेंद्र सिंह ने तीन व किशन सिंह चौधरी ने दो सेट नामांकनपत्र खरीदे थे। शनिवार को दोनों ने लाव लश्कर के साथ नामांकन किया। जानकारी रहे कि भाजपा-रालोद के पास आठ-आठ जिला पंचायत सदस्य हैं, जबकि बसपा के पास 13 जिला पंचायत सदस्य हैं। एक सपा का एक और तीन सदस्य निर्दलीय हैं।
बसपा नेताओं में नहीं बन सकी एकराय
पार्टी के पास सर्वाधिक 13 जिला पंचायत सदस्य होने के बाद भी किसी को भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर लड़ने के लिए हरी झंडी नहीं दी गई। लिहाजा बसपा जिला पंचायत चुनाव में जीती हुई बाजी हार गई। जिस दिन बसपा के पूर्व मंत्री पं. श्याम सुंदर शर्मा की पत्नी तथा पूर्व विधायक राजकुमार रावत के भाई की पत्नी जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीती थीं, पार्टी में उसी दिन से हलचल मचनी प्रारंभ हो गई थी।
बाकी के जिला पंचायत सदस्य इस बात के लिए आशंकित थे कि दोनों जब एक दूसरे की बात नहीं मानेंगे तो आखिरकार जिला पंचायत अध्यक्ष के उम्मीदवार का चयन कैसे होगा। पार्टी में कई दौर की बैठकें चलीं, परंतु सब बेकार साबित हुआ।