मथुरा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत तेहरिया और सचिव सतेद्र परिहार पर लगे आरोपों की जांच को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने पूर्व पदाधिकारियों की समिति को सौंप दिया है। यह जांच होने तक फिलहाल काउंसिल द्वारा निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी है।
बार अध्यक्ष और सचिव को तीन दिन पूर्व बार काउंसिल ने एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया। दस वर्ष के लिए बार काउंसिल के पर्यवेक्षण में रखने का आदेश भी दिया था। उन पर बार एसोसिएशन से १२०० अधिवक्ताओं के निष्कासन, बार एसोसिएशन के चुनाव में वोटों की गड़बड़ी तथा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे थे।
इन्हीं आरोपों की जांच पूरी होने पर बार काउंसिल ने एक वर्ष के लिए उन्हें निलंबित किया था। आदेश में दस वर्ष तक आचरण के पर्यवेक्षण की बात भी कही गई थी। बार काउंसिल के इस आदेश के खिलाफ अध्यक्ष और सचिव ने बार काउंसिल में प्रार्थना पत्र दिया। उन्हें बिना सुने बार काउंसिल ने आदेश जारी किया है।
उनकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बार काउंसिल चेयरमैन मधुसूदन त्रिपाठी द्वारा अपने पूर्व आदेश पर रोक लगाते हुए जांच के लिए नई विशेष जांच समिति गठित कर दी है। इस समिति में बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार त्रिपाठी तथा पूर्व सह अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ शामिल हैं। बार काउंसिल के चेयरमैन मधुसूदन त्रिपाठी ने बताया कि विशेष जांच समिति द्वारा इसकी पुन: जांच की जा रही है। तब तक पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है।