दो साल के बच्चों को सात जानलेवा बीमारियों से बचाने की मुहिम में जिला फिसड्डी साबित हो रहा है। राष्ट्रीय टीकाकरण में मथुरा प्रदेश में 74वें स्थान पर है। ऐसे में अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बच्चों को सात जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को लेकर केंद्र सरकार गंभीर है लेकिन जिले के अफसर लापरवाह हैं। आलम ये है कि मथुरा प्रदेश में आखिरी पायदान पर है।
इस टीकाकरण को लेकर गांव अंचल में एएनएम, आशाएं कार्य करती हैं और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इनकी फीडिंग का कार्य होता है। मुख्यालय स्तर पर एसीएमओ स्तर के अधिकारी पूरे कार्यक्रम भी मॉनीटरिंग करते हैं। माइक्रो प्लॉन भी है लेकिन नतीजा सिफर।
इन बीमारियों से होता है बचाव
राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत दो साल तक के शिशुओं को पोलियो, डिप्थीरिया, काली खांसी, हिपेटाइटिस बी, खसरा और टीबी से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है। अभियान में सड़कों के किनारे, ईट भट्टों पर कार्यरत मजदूरों को भी शामिल किया जाता है। जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उपकेंद्र के अलावा अरबन हेल्थ पोस्ट पर भी टीकाकरण किया जाता है।
गांव से पीछे शहर
राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत मथुरा में कुल 62 प्रतिशत टीकाकरण हुआ है। इसमें ग्रामीण अंचल का टीकाकरण 70 प्रतिशत के करीब है। शहरी इलाके में आंकड़ा मात्र 52 प्रतिशत है।
हमने जीवन हैल्थ कैंप में टीकाकरण पर ही फोकस किया है। अभी तक केवल बुधवार और शनिवार को टीकाकरण हो रहा था। अब कम टीकाकरण वाले इलाकों में सोम, मंगल और गुरुवार को एएनएम की टीम भेजी जा रही हैं।
- डा. विवेक मिश्रा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी