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मथुरा : 40 में से 10 अधिकारियों ने सौंपा डिफॉल्टर शिक्षण संस्थाओं का कच्चा चिट्ठा

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मथुरा। फर्जी छात्र दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पने वाली शिक्षण संस्थाओं की जांच करने में जांच अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते 40 में से सिर्फ दस अधिकारी ही अपनी रिपोर्ट दे सके हैं, जबकि पांच नोडल अधिकारियों में भी अभी तक सिर्फ एक ही नोडल अधिकारी रिपोर्ट दे पाए हैं। इन अधिकारियों को सीमित समय में रिपोर्ट देनी थी लेकिन वह नहीं दे पा रहे हैं।
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छात्रवृत्ति घोटाला होने के बाद शासन ने मथुरा के 561 उच्च शिक्षण संस्थाओं की कई स्तर की जांच कराने का निर्णय लिया है। शासन ने 14 बिंदुओं पर निर्धारित जांच के लिए जनपद में पांच नोडल अधिकारी बनाए थे। समाज कल्याण विभाग ने इनका तय प्रारूप के साथ भौतिक सत्यापन कराने के लिए 40 अधिकारियों को लगाया था। यह अधिकारी तय प्रारूप के हिसाब से शिक्षण संस्थाओं का मौके से सत्यापन कर करेंगे। इनमें से करीब दस अधिकारियों की रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी को मिल चुकी है। पांच में से एक कोटवन पॉलीटेक्निक के प्राचार्य ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि दस अधिकारियों व एक नोडल अधिकारी की रिपोर्ट आ गई है।
अधिकारी पशोपेश में
रिपोर्ट को लेकर जांच कर रहे अधिकारी धोखाधड़ी करने वाले विद्यालय संचालकों की ताकत को देखकर पशोपेश में हैं। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि शिक्षण संस्थाओं के संचालकों के संबंध राजनीति से लेकर उच्चाधिकारियों तक हैं। वह इन्हीं संबंधों के चलते विद्यालयों में फर्जीवाड़ा किए हैं। यदि सही जांच रिपोर्ट दे दी तो विद्यालय तो खत्म हो ही जाएंगे, साथ ही जांच करने वाले अधिकारियों को भी प्रताड़ित किया जा सकता है।
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