मथुरा। चैत्र नवरात्र इस बार 22 मार्च से शुरू हो रहे हैं। इसी के साथ नवसंवत्सर की भी शुरुआत हो जाएगी। इस बार की चैत्र नवरात्र को खास माना जा रहा है। ये पूरे 9 दिन के होंगे। इस बार मां दुर्गा का आगमन नाव यानी नौका पर हो रहा है, जबकि नवरात्र की समाप्ति पर मां हाथी पर सवार होकर देवलोक को वापस जाएंगी।दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निर्देशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि चैत्र नवरात्र इस बार पूरे 9 दिनों के होंगे। इस बार नवरात्र के अंतिम दिन रामनवमी पर गुरु पुनर्वसु नक्षत्र का योग बन रहा है। 22 मार्च को प्रथम शैलपुत्री की पूजा के साथ ही घट स्थापना की जाएगी। 30 मार्च को महागौरी की पूजा के साथ राम नवमी भी मनाई जाएगी। नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहे हैं ऐसे में माता का आगमन नौका पर होगा जो फसल, धन धान्य और विकास के लिए काफी लाभदायक रहेगा।
ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता ने बताया कि इस बार चैत्र नवरात्र के दिन कई शुभ योग भी रहेंगे जैसे, गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, हंस योग, शश योग, धर्मात्मा और राज लक्षण योग इस दिन रहेंगे। ऐसे शुभ संयोगों के कारण चैत्र नवरात्र भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहने वाले हैं। चैत्र नवरात्र का आरंभ अबकी बार 4 ग्रहों की युति से हो रहा है।
शरद चतुर्वेदी ने बताया कि मीन राशि में 4 ग्रह गुरु, सूर्य, चंद्रमा, बुध साथ होंगे। ऐसे में मीन राशि में कई शुभ योग बनेंगे। चैत्र नवरात्र 22 मार्च को जिस दिन नवरात्र का आरंभ हो रहा है उस दिन मीन राशि में 4 ग्रहों का संयोग हो रहा है। मीन राशि में गुरु के साथ सूर्य, बुध, चंद्रमा होंगे। मीन राशि में 4 ग्रहों के साथ होने से मीन राशि में बुधादित्य योग, गजकेसरी योग, हंस योग उपस्थित रहेगा।
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 22 मार्च को चैत्र नवरात्र पर घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 29 मिनट से लेकर 07 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा कई शुभ मुहूर्त हैं घट स्थापन करने के लिए तथा 11:48 पर अभिजीत बेला भी प्रारंभ हो जाएगी। नवरात्र पर प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ 9 दिनों तक देवी आराधना का महापर्व शुरू हो जाएगा।
कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना के लिए सूर्योदय से पहले उठें व स्थान कर साफ कपड़े पहनें। फिर चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मातारानी की प्रतिमा स्थापित करें। इस कपड़े पर थोड़े चावल रखें। एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर इसपर कलावा बांधे। कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर अशोक या आम के पत्ते रखें। एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधे।
इस नारियल को कलश के ऊपर रखते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें। इसके बाद दीप जलाकर कलश की पूजा करें। घरों में कुल देवी की पूजा कर लाल चूनर जरूर अर्पित करें। नवरात्रि के नौ दिनों में मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए।