महावन (मथुरा)। महावन सहकारी समिति के अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा जिलाध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष में नोकझोंक हो गई। अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के चलते धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। आखिरकार पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त जिलाध्यक्ष ने जिला उपाध्यक्ष को पदमुक्त करते हुए छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है, जबकि जिला उपाध्यक्ष ने कहा कि जिलाध्यक्ष को कोई अधिकार नहीं। इस मामले में कोई भी तहरीर थाना महावन पर नहीं दी गई है।
रविवार को सहकारी समिति महावन पर पहुुंचीं जिलाध्यक्ष मधु शर्मा ने देखा कि यहां पार्टी के विरोध में कार्य हो रहा है। इस पर जिलाध्यक्ष ने जिला उपाध्यक्ष से पूछा। इसी बात को लेकर जिलाध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष में नोकझोंक होते हुए धक्का-मुक्की होने लगी। हालांकि पास में खड़े भाजपाइयों ने दोनों को अलग-अलग कराया। जिलाध्यक्ष का आरोप है कि जिला उपाध्यक्ष मनीषा पाराशर पार्टी विरोध में कार्य करती पाई गई हैं। उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करते हुए छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
यहां पर दिलीप यादव भाजपा समर्थित उम्मीदवार था। उधर, जिला उपाध्यक्ष का कहना है कि जिलाध्यक्ष का कोई अधिकार नहीं उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दें। वह साल 2011 में भाजपा से जुड़ी हैं, जबकि जिलाध्यक्ष ने साल 2017 में भाजपा का दामन थामा है। जिला उपाध्यक्ष का कहना है कि भाजपा कार्यकर्ता हेमेंद्र शर्मा की पत्नी नंदिनी शर्मा के समर्थन में वह जुटी हुई थीं, जो कि पार्टी समर्थित हैं। भाजपा समर्थित नंदिनी को जीत भी मिली हैं, जबकि जिलाध्यक्ष दिलीप यादव को पार्टी उम्मीदवार बता रही हैं उसे हार मिली है। प्रभारी निरीक्षक मोहित पाराशर ने बताया कि इस मामले में कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।