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वृंदावन के दुकानदार सामान्य दिनों में भी नहीं खोल रहे दुकानें

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वृंदावन। जो दुकानें कभी दिन ही नहीं, रात में भी खुलती थीं, उन्हें अब दुकानदार खोलने को तैयार नहीं हैं। कहते हैं कि जब ग्राहक ही नहीं है तो किसके लिए दुकानें खोलें। स्थिति यह है कि वृंदावन के अधिकांश बाजार शनिवार और रविवार के पूर्ण लॉकडाउन की तरह अन्य दिनों में भी बंद रहते हैं।
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लॉकडाउन से पहले भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थलियों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक वृंदावन में नजर आती थी। इसके चलते यहां का व्यापार भी धार्मिक पर्यटकों पर ही निर्भर हो था। अब कोरोना संक्रमण के दौर में इनका आना बंद है, तो वृंदावन की व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हैं। ऐसे में लॉकडाउन के बाद वृंदावन के अधिकतर व्यापारी दुकान नहीं खोल रहे हैं। सिर्फ आवश्यक सामान की दुकानों पर ग्राहक पहुंच रहे हैं।
दुकान खोलने से क्या फायदा
वृंदावन में व्यवसाय सिर्फ ठाकुर जी से जुड़ा हुआ है। यहां आने वाले पर्यटक ही वृंदावन को रोजगार प्रदान करते हैं। वे ठाकुर जी के शृंगार से जुड़ा सामान खरीद कर ले जाते हैं। अब पर्यटक ही नहीं है तो दुकान खोलने से क्या फायदा है।
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जेपी गौड़, गोविंद देव मंदिर क्षेत्र
कुछ ही दुकान खुल रही हैं
दुकान खोलें या न खोलेें, कोई मतलब नहीं है। सिर्फ दुकान खोलकर कुछ देर बैठ आइए, ग्राहक तो इस वक्त है ही नहीं। यही कारण है कि वृंदावन के बाजार में कुछ ही दुकानें खुल रही हैं।
जितेंद्र वार्ष्णेय, गोपीनाथ बाजार
किसके लिए खोले दुकानें
स्थानीय लोगों की आवश्यकता के लिए दुकान खुल रही हैं। इसमें ठाकुर जी के शृंगार या फिर पर्यटक से जुड़े सामान की बिक्री इस वक्त शून्य है। फिर दुकान किसके लिए खोली जाएं। सामान्य दिनों में भी वृंदावन के बाजार नहीं खुल रहे हैं।
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योगेश अग्रवाल, शाहजी मंदिर
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