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Mathura News: मान मनाैव्वल में फेल हुए कई सिपहसालार, नहीं बनी थी बात

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वृंदावन। श्री बांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर और न्यास के अध्यादेश से नाराज हुए मंदिर के सेवायत और क्षेत्रीय लोगों को समझाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कई सिपहसालार पहुंचे। बैठकों का दौर भी चला। एक बार बैठक का बॉयकाट भी हुआ। हंगामा हुआ, लेकिन गोस्वामीजन किसी भी सूरत में झुकने को तैयार नहीं हुए। अध्यादेश को गोस्वामी समुदाय ने अदालत में चुनौती दी तो सरकार भी कोर्ट पहुंच गई, लेकिन अब अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रोक लगा दी है।
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अभी हाल में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के साथ हुई बैठक के दौरान भी सेवायतों ने कहा था कि सरकार एक ओर बातचीत से हल निकालने की बात करती है, तो वहीं अदालत में उसका रुख बिल्कुल अलग नजर आता है। सेवायतों ने इसे सरकार की दोहरी नीति करार दिया था और स्पष्ट किया कि वे किसी भी कीमत पर न तो मंदिर न्यास को स्वीकार करेंगे और न ही कॉरिडोर परियोजना को।


अधिकारियों की बात सुनने को तैयार नहीं थे सेवायत

सेवायतों को मनाने के लिए बीते दिनों प्रशासन और सरकार की ओर से कई उच्च अधिकारी और मंत्री मथुरा पहुंचे। सबसे पहले प्रशासनिक स्तर पर एडीजी आगरा जोन अनुपमा कुलश्रेष्ठ, मंडलायुक्त शैलेंद्र सिंह, डीआईजी शैलेष पांडेय, डीएम सीपी सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने सेवायतों और कारोबारियों से वार्ता की। हालांकि कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन पाई और सभी अधिकारी बिना नतीजे के लौट गए।
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मंत्रियों का भी नहीं चला जादू
जब प्रशासनिक कोशिशें नाकाम रहीं तो सरकार ने अपने मंत्रियों को आगे बढ़ाया। सबसे पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा मंदिर पहुंचे, लेकिन सेवायतों ने उनका खुलकर विरोध किया। मंदिर परिसर में जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। मंत्री ने महिलाओं से बात कर सुलह की कोशिश की, लेकिन सेवायत अपने रुख पर अड़े रहे।
इसके बाद गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण ने मोर्चा संभाला और आश्वासन दिया कि सरकार किसी का अहित नहीं चाहती। लेकिन सेवायतों ने उनकी बातों को भी दरकिनार कर दिया। आखिरी कोशिश के तौर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण एक साथ वृंदावन पहुंचे, लेकिन यह प्रयास भी विफल रहा। सरकार की ओर से किए गए सभी प्रयास फिलहाल असफल साबित हुए हैं।
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