भगवान जम्बूस्वामी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र चौरासी में चल रहे महामस्तकाभिषेक महोत्सव में सुबह 7:30 बजे श्रीजम्बूस्वामी विधान का आयोजन किया गया। इसके बाद राष्ट्रसंत श्रमण मुनिश्री विहर्षसागर के मंगल प्रवचन हुए।
मुनिश्री ने भगवान के कलश अभिषेक का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान बाहुबली पर जब प्रथम मस्तकाभिषेक हुआ तो बड़े-बड़े कलशों से अभिषेक करने पर भी जल नीचे नहीं आया। इस दौरान एक बूढ़ी मां एक छोटी सी लुटिया लेकर भगवान का अभिषेक करने को कहने लगी तो लोगों ने कहा कि इस लुटिया से क्या अभिषेक होगा।
बार-बार अनुरोध पर जब बूढ़ी मां को अभिषेक करने दिया गया तो उसने जैसे ही अभिषेक किया, जल की धारा नीचे तक फूट पड़ी। इस पर मुनिश्री ने बताया कि हमारे जीवन में भावों का महत्व सबसे ज्यादा है। अच्छे भाव से किया गया भगवान का अभिषेक ही हमारे अशुभ कर्मों को नष्ट करता है।
इस अवसर पर विशेष जैन, संजीव जैन, पीसी छाबड़ा, श्रेष्ठी, शिखर चन्द्र, सिंघई, जिनेन्द्र जैन, सेठ विजय कुमार, महामंत्री डा. जयप्रकाश जैन, कोषाध्यक्ष सुभाष चन्द्र जैन, राजीव जैन आदि उपस्थित थे।