मथुरा। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए अनिवार्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने का आदेश दिया है। जिले के प्राइमरी व जूनियर में करीब 2950 शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने टीईटी परीक्षा पास नहीं की है। ऐसे में उनकी नौकरी पर संकट के बादल छा गए हैं। जिन्होंने वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया और काबिल बनाया, अब उनकी ही नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। अपनी काबिलियत सिद्ध करने के लिए उन्हें पहले टीईटी उत्तीर्ण करना होगी। उधर, अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बेसिक शिक्षाधिकारियों से टीईटी न करने वाले शिक्षकों की सूची मांगी है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीईटी न करने वाले शिक्षक नौकरी को लेकर खासे परेशान हैं। जिले में 5600 से अधिक शिक्षक प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि प्राइमरी के लिए टीईटी में बीएड वाले आवेदन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में वह कैसे टीईटी करेंगे। उन्होंने बताया कि 2008-10 के बीएड डिग्री धारक प्राइमरी शिक्षक व जिनकी नियुक्ति 2011 के पूर्व हुई है, वह शिक्षक प्रभावित होंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कमल कौशिक ने बताया कि किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो शिक्षकों के साथ आंदोलन भी किया जाएगा। इस मामले मे केंद्रीय प्रतिनिधि मंडल से भी मुलाकात की जाएगी।
शिक्षकों की बात
जब शिक्षक बनी थीं तो नियुक्ति के समय सभी दक्षताएं पूर्ण थीं। सरकार ने उन्हें पात्र समझा और शिक्षक के रूप में भर्ती किया, लेकिन अब अचानक कैसे अपात्र हो गईं।
- दिव्या मिश्रा, जिलाध्यक्ष महिला शिक्षक संघ
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के शिक्षक दुखी हैं। 20 वर्ष पूर्व विभाग के मानक के अनुसार नियुक्त हुए शिक्षक अब कैसे अपात्र हो सकते हैं।
- गोवर्धन दास गुप्ता, जिला मीडिया प्रमुख राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
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सुप्रीम कोर्ट और सरकार का यह आदेश पुराने शिक्षकों के लिए गलत है। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि शिक्षकों के भविष्य को संरक्षण प्रदान करें। सभी शिक्षक सरकार के नियमों के अनुसार ही भर्ती हुए हैं।
- अर्चना वर्मा, शिक्षक
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वह जब शिक्षक बने थे तो शिक्षा विभाग के मानक पूरे किए थे। न्यायालय और सरकार को इस मामले में विचार करना चाहिए। इतने साल बाद यह आदेश शिक्षकों को दिया जा रहा है।
- अवधेश कुमार, शिक्षक