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Mathura News: कैनवास पर उतरे रंगों में दिख रहा राधा-कृष्ण का प्रेम

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वृंदावन। वृंदावन की गलियों में जहां हर ओर राधे-राधे की गूंज सुनाई देती है, वहीं इन दिनों गीता शोध संस्थान में रंग और तूलिका से कृष्ण भक्ति की नई तस्वीरें आकार ले रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए चित्रकार कैनवास पर राधा-कृष्ण के प्रेम, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को उकेर रहे हैं। खास बात यह है कि इन चित्रों को तैयार होने के बाद देखने के बजाय कला प्रेमियों को कलाकारों की पूरी सृजन प्रक्रिया सामने बैठकर देखने का मौका मिल रहा है।
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उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के तत्वावधान में वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय ‘श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप-2026’ का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए 20 चित्रकार अपनी-अपनी विशिष्ट कला शैलियों में कृष्ण की लीलाओं को कैनवास पर उतारने में जुटे रहे। किसी ने कैनवास पर राधा-कृष्ण के प्रेम की कोमल छवि दिखाई तो किसी ने माखन चुराते नटखट कन्हैया की बाल लीला। कुछ चित्रकारों ने ब्रज के प्राकृतिक परिवेश और आध्यात्मिक वातावरण को अपनी कलाकृतियों का विषय बनाया।
शिविर में पद्मश्री शांति देवी (मधुबनी), डॉ. अलका झा (इंदौर), डॉ. बंदना जोशी (नाथद्वारा), डॉ. पूनम रानी (अलीगढ़), नीतिक्षा डावर (दिल्ली), डॉ. खुशबू उपाध्याय (गाजियाबाद), नेहा (लखनऊ), मनजीत कौर (चंडीगढ़), डॉ. अलका मनीष पाठक (सीहोर), सोमा आनंद (पटना), विनीता सिंह (पटना), विनीता शर्मा (जयपुर), कंचन प्रकाश (ग्रेटर नोएडा), सुमित्रा अहलावत (दिल्ली), सुमन डोंगरे (उज्जैन), प्रिंस राज (मेरठ), विनोद कुमार सिंह (लखनऊ), जयेश त्रिवेदी (उज्जैन) और ललित कला अकादमी, आगरा के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह सहित 20 चित्रकार प्रतिभाग किया। शिविर के संयोजक एवं गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने बताया कि विभिन्न प्रदेशों से आए 20 चित्रकारों का चित्रांकन लगभग पूरा हो चुका है। 9 सितंबर को कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके बाद 10 सितंबर से तैयार चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
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