वृंदावन। नगर के छटीकरा मार्ग स्थित भागवत निवास आश्रम से शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य वापसी रथयात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर भागवत निवास आश्रम में विश्राम करने के बाद भगवान जगन्नाथ सनातनी परंपराओं के अनुसार पुन: अपने मुख्य धाम पानीघाट स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए रवाना हुए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के स्नान उत्सव के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद रथयात्रा के साथ स्वस्थ होकर भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर जाते हैं। इसी दिव्य लीला के तहत नौ दिन पूर्व पानीघाट स्थित जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा निकाली गई थी, जो छटीकरा मार्ग स्थित भागवत निवास आश्रम पहुंची थी। यहां नौ दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा ने प्रवास किया। इस दौरान भक्तों ने उनका सेवा-सत्कार किया। इस दौरान छप्पन भोग सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। शुक्रवार को आतिथ्य स्वीकार करने के बाद भगवान की गृह वापसी यात्रा शुरू हुई। वापसी यात्रा से पहले भागवत निवास आश्रम में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की महाआरती की गई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ तीनों विग्रहों को पुष्पों से सजे भव्य रथ पर विराजमान कराया गया।
जैसे ही रथ आगे बढ़ा, पूरा क्षेत्र ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्ण’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने रथ की डोरी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। यात्रा भागवत निवास आश्रम से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और तिराहों से होती हुई पानीघाट स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और आरती उतारी। शोभायात्रा में संकीर्तन मंडलियां भजन प्रस्तुत करती चल रही थीं। भजनों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। यात्रा के दौरान भक्तों को प्रसाद का वितरण भी किया गया। देर शाम भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को पानीघाट स्थित मुख्य जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में पुन: विराजमान कराया गया। मंदिर सेवायत सुखदेव बाबा ने बताया कि ब्रज में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और वापसी यात्रा की परंपरा सदियों पुरानी है।