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लॉकडाउन : इलाज के अभाव में जच्चा-बच्चा की मौत

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मथुरा। मृतका परवाना फाइल फोटो। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। सील किए गए मेवाती मोहल्ले में रविवार की सुबह गर्भवती महिला के परिजन मदद की गुहार लगाते रहे। उसकी गुहार न पुलिसकर्मियों ने सुनी न चिकित्सकों ने। सोमवार को आगरा के अस्पताल में बच्चा और जच्चा की मौत हो गई। गर्भवती की परेशानी को अमर उजाला ने सोमवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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मामला वार्ड संख्या 38 के मेवाती मोहल्ले का है। यह इलाका सील किया गया है। यहां के रहने वाले मजदूर लाला की 26 वर्षीय पत्नी परवाना गर्भवती थी।
रविवार सुबह करीब छह बजे उसे दर्द शुरू हुआ। पति हॉटस्पॉट की गली पर तैनात पुलिसकर्मियों से गुहार कर ही रहा था कि पत्नी की हालत और बिगड़ गई और उसे रक्तस्राव हो गया। काफी चीख-पुकार के बाद भी पुलिस ने चिकित्सकीय सुविधा मुहैया नहीं कराई, जिसके चलते उसकी हालत और खराब होती गई। किसी प्रकार से स्थानीय संभ्रांतजनों की मदद से लाला निजी रिक्शा (ढकेल) पर लिटाकर महिला को जिला अस्पताल ले गया। जहां पर मौजूद चिकित्सकों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया और आगरा रेफर कर दिया।
किसी तरह एंबुलेंस की व्यवस्था हुई और महिला को आगरा ले जाया गया। आगरा में एक प्राइवेट अस्पताल में उसे भर्ती कराया, जहां पर गर्भवती परवाना ने पुत्र को जन्म तो दे दिया लेकिन जन्म देते ही बच्चा और जच्चा की मौत हो गई। पति लाला उसके शव को लेकर घर पहुंचा। लाला ने बताया कि यदि उसे समय से चिकित्सा मिल जाती तो उसकी पत्नी जिंदा रहती। पार्षद शाहिदा ने बताया कि गली के बाहर मौजूद पुलिसकर्मी यदि चाहते तो परवाना को समय से चिकित्सा मिल जाती। उसके बाद जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने भी उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया।
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मामला गंभीर, हम जांच करा रहे
जिला अस्पताल से मरीजों को लौटाने की शिकायतें मिली हैं। इन मामलों को गंभीरता से लिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
- सर्वज्ञराम मिश्र, जिलाधिकारी
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