अपने आराध्य को सर्दी से बचाने के लिए श्रद्धालु हर जतन कर रहे हैं। कोई उन्हें रजाइयों में सुला रहा है तो कोई ऊनी परिधान पहना रहा है। इसी मांग को देखते हुए ठाकुरजी के ऊनी वस्त्रों की हर प्रकार की क्वालिटी और रेंज बाजार में आ गई है। इन्हें खरीदने के लिए श्रद्धालुओं में उत्सुकता और श्रद्धा का भाव देखा जा सकता है।
मान्यता है कि भगवान भक्तों की भावना के वशीभूत होते हैं। भक्त की अपने आराध्य को रिझाने के लिए उनकी भावपूर्ण सेवा करते हैं।
इसी भाव सेवा के तहत भक्त इन दिनों अपने आराध्य को ठंड से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। पोशाक व्यवसायी विनोद अग्रवाल, रमेश शर्मा ने बताया कि ऊनी पोशाक तैयार करने का कार्य सर्दी आने से पूर्व शुरू हो जाता है।
उन्होंने बताया कि ठाकुरजी की ऊनी पोशाक दस से लेकर हजारों रुपये कीमत में बाजार में उपलब्ध है। कश्मीरी पश्मीना और जालंधर की गर्म पोशाक की मांग अधिक है।
करोड़ों का है बिजनेस
नगर में ऊनी वस्त्र उद्योग लगातार ऊंचाई छू रहा है। पोशाक निर्माण कुटीर उद्योग के रूप में बाजार का रूप ले रहा है। एक आकलन के मुताबिक यह व्यवसाय कई करोड़ रुपये का है। वस्त्र विक्रेता महेश शर्मा ने बताया कि देशी-विदेशी और एनआरआई भक्त इसके बड़े ग्राहक बन रहे हैं।