भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज
भागवत कथा में पहले दिन कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपने मुखारविंद से श्रृद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान कराया। शुभारंभ जगद्गुरु नाभा द्वाराचार्य सुतीक्षण दास महाराज व मंदिर के महंत रामरतन दास महाराज भागवतजी की आरती उतारकर किया।
अनिरुद्धाचार्य ने भागवत के महात्म्य पर चर्चा की। कथा सुनने के फल को बताया। कहा कि भगवान की कथा सुनने मात्र से मनुष्य के पापों का नाश तो होता ही है, हम भगवान की कृपा से भी जुड़ जाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा कलियुग में वह साधन है, जिससे सभी मनोकामनाओं को पूर्ति हो सकती है। जैसे धुंधकारी जैसे प्रेत को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
आप जिस कामना के साथ कथा सुनेंगे वह जरूर पूरी होगी। धर्म और कर्म में अंतर को समझाया। बताया कि श्रेष्ठ मनुष्य बनने के लिए किन कर्मों को करना चाहिए और किनसे बचना चाहिए। कहा कि ईश्वर ने हमें कर्म करने की आजादी तो दी है, परंतु उस कर्म से मिलने वाले फल की नहीं। भुगतना वैसा ही पड़ेगा जैसा हम कर्म करेंगे। भजनों पर पंडाल में श्रद्धालु झूमते रहे।