मथुरा। ११ वर्ष पूर्व शहर के बीच हुए पंकज चतुर्वेदी हत्याकांड के एक अभियुक्त को एडीजे अष्टम संजय चैाधरी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्त ने पहले खुद को नाबालिग बताकर सजा से बचने का प्रयास किया। वारदात के दो अभियुक्तोें को वर्ष 2014 में ही आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
शहर कोतवाली क्षेत्र में द्वारिकाधीश मंदिर के पास 23 अगस्त 2011 को पंकज चतुर्वेदी निवासी गली सेठ भीकचंद छत्ता बाजार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात में मृतक के भाई रिंकू और एक अन्य गोली लगने से घायल हुए थे। हत्याकांड में दीपक चतुर्वेदी निवासी गली सेठ भीकचंद ने सोनू उर्फ सोमा उर्फ सोमनाथ, सुमित उर्फ नंगा उर्फ राहुल और तरुण चतुर्वेदी के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी तरुण चतुर्वेदी ने खुद को नाबालिग घोषित कर अपनी फाइल को अलग करा लिया था।
अदालत सोमनाथ और सुमित को वर्ष 2014 में आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। तरुण चतुर्वेदी अदालत में खुद को नाबालिग साबित नहीं कर सका इसके बाद उसकी सुनवाई एडीजे अष्टम संजय चौधरी की अदालत में हुई।
एडीजीसी मुकेश बाबू गोस्वामी ने बताया कि तरुण ने खुद को नाबालिग घोषित कर सजा से बचने का प्रयास किया था। सुनवाई के दौरान वह खुद को नाबालिग सिद्ध नहीं कर सका। अदालत ने मंगलवार को तरुण चतुर्वेदी को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। पंकज चतुर्वेदी हत्याकांड में नामजद दो अभियुक्तों को पूर्व में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।