आधी रात को छत के मलबे में से निकली तीन बहनों की सांस की आस परिवार के लोगों ने अंत तक नहीं छोड़ी। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया तो शव मोर्चरी में पहुंचाया गया। यहां घरवालों को एहसास हुआ कि दो बहनों की सांसें चल रही हैं।
इसके बाद हंगामे के बीच तीनों बहनों के जीने की उम्मीद में उन्हें फिर डाक्टर्स के पास लाया गया लेकिन यहां नसीब में सिर्फ आंसू ही आए। तीनों को फिर मृत बताया गया।
बुधवार तड़के चार तीन बहनों के पास मौजूद घरवालों को दो बहनों के सांस लेने का एहसास हुआ। इसके बाद तेजी के साथ सभी जिला अस्पताल में उपस्थित डा. मुकुंद बंसल के पास पहुंचे। बताया कि बहनें जीवित हैं और आप लोगों ने मृत घोषित कर दिया है।
इस बात को लेकर हंगामा होने लगा। आसपास के लोग भी तेजी से डाक्टरों की ओर बढ़े। जल्दी से तीनों बहनों को अस्पताल परिसर की मोर्चरी से वापस फिर इलाज के लिए लाया गया। यहां डाक्टर्स की टीम ने उन्हें देखा और मृत घोषित कर दिया।
तड़के 4:30 पर उम्मीद की आंखों से फिर गम के आंसू बरसने लगे। लोग एक-दूजे को ढांढस बंधाते-बंधाते खुद रोने लगते। असमय मौत का सच सामने था और लोग तीन बेटियों की जग से विदाई को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे।
साथ जली सगी बहनों की चिताएं
यमुना घाट पर कुशक गली के साथ-साथ शहर के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। तीन चिताएं साथ रखी गईं। उनके जलते ही लोगों की आंखें नम हो गईं। कल तक हंसती-खेलती बहनों को लोग दिल पर पत्थर रखकर आखिरी विदाई दे रहे थे।