भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली में यमुना किनारे बसा पुराना शहर बीते दो दशक से दहशत में है। आए दिन टीलेनुमा इस क्षेत्र में मकानों की दीवारें दरकती हैं। ऐसे कई मौके आए जब लोगों की जिंदगी बाल-बाल बची। लोगों ने घर छोड़ दिए।
बीती मध्य रात को कुशक गली में एक पुराने मकान की छत ढहने से तीन लोगों को मौत हो गई। इसकी चपेट में आए कई लोग अभी भी अस्पताल में हैं। इस क्षेत्र में मकान के गिरने से जनहानि पहली बार हुई है लेकिन आर्थिक चोट तो यहां के लोगाें के मुकद्दर का हिस्सा बन गई है।
आए दिन इस क्षेत्र में मकानों का फटना आम बात है। कभी जमीन धसकती है तो कभी दीवारे और छत चटक जाती हैं। ऐसी स्थित बीते दो दशक से चल रही है। इसके चलते शायद ही कोई ऐसी गली या मोहल्ला होगा जहां मकान न फटे हों। लेकिन, इस समस्या का समाधान नहीं खोजा जा सका है।
शहर में 223 पुराने भवन
करीब पांच साल पहले कराए गए पालिका के सर्वे के अनुसार शहर में 223 पुराने भवन हैं। इसमें अधिकांश हवेलियां हैं जो 100 से 200 साल पुरानी हैं। घनी आबादी के बीच बने यह भवन कभी भी मुसीबत बन सकते हैं। जब भी देश में कहीं भूकंप या अन्य किसी कारण इस प्रकार के भवनों के गिरने से जनहानि होती है तो अफसरों की सक्रियता बढ़ जाती है, लेकिन समय गुजरते ही सभी इस विषय को भूल जाते हैं।
प्रभावित क्षेत्र
रामजी द्वारा, गली भीकचंद्र, कुशक गली, गोलपाड़ा, काला महल, हनुमान टीला, मानिक चौक, ककोरन घाटी, गूजर घाटी, नगला पाइसा, गजा पाइसा, शीतला घाटी, लालागंज, महोली की पौर, गली पीरपंच, गूजरहट्टा, चौबिया पाड़ा।
मुख्यमंत्री राहत कोष से मांगी मदद
कुशक गली में मकान गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद प्रभावित परिवार की आर्थिक सहायता के लिए शासन को पत्र भेजा है। इसमें दो लाख रुपये की आर्थिक मदद मुख्यमंत्री राहत कोष से करने की संस्तुति डीएम ने की है।