उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित जिले के 450 माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्रों में से सिर्फ 1378 छात्रों को ही इस बार छात्रवृत्ति मिलने जा रही है। जबकि, दोनों कक्षाओं में पंजीकृत छात्रों की संख्या 1.25 लाख से अधिक है। माना जा रहा है कि अफसरों की लापरवाही के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
बता दें कि राज्य सरकार कम आय वर्ग के बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करती है। इसमें हाईस्कूल के अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को 720 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र-छात्राओं को 2250 रुपये प्रति वर्ष दिए जाने का प्रावधान है।
इंटर के छात्र-छात्राओं के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के लिए 2300 और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए 2360 रुपये स्कालरशिप दी जाती है।
जिले में यूपी बोर्ड से 2016 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देने के लिए 1.25 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इसमें से स्कॉलरशिप के लिए सिर्फ 3523 ने ही आवेदन किया। इसमें हाईस्कूल के 1300 और इंटर के 2223 आवेदन शामिल रहे।
आवेदकों की इतनी कम संख्या की वजह विभागीय अफसर और शिक्षण संस्थाओं की लापरवाही रही। किसी भी स्तर पर छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रेरित नहीं किया गया। इसके चलते महज 3523 ही आवेदन हो सके। इसमें से भी 2145 आवेदन विभिन्न कारणों से जांच के दौरान निरस्त कर दिए गए। अब सिर्फ शैक्षिक सत्र 2015-16 के 1378 छात्र-छात्राओं को ही स्कालरशिप मिलेगी।