सोमवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक आयोग के समक्ष पेश होकर जवाहरबाग के संबंध में अपना पक्ष रखा। कहा गया कि जो भी हुआ उसके लिए अफसर जिम्मेदार हैं। अगर शुरुआत में ही बाग को खाली करा लिया गया होता तो यह हालात न होते। अब दो दिन बाद पुलिस वालों की गवाही होनी है।
मथुरा के जवाहरबाग में दो जून को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में पचास से भी ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए थे जिन्हें पुलिस ने जेल भेज दिया था। इस हिंसा की जांच के लिए सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग पूरे मामले की जांच कर रहा है। पहले चरण में लोगों ने पेश होकर अपनी बात रखी जबकि दूसरे चरण में शपथ पत्र दिए गए। अब गवाही हो रही है।
सोमवार को न्यायिक आयोग के सचिव पीके गोयल के समक्ष अधिवक्ता पेश हुए और जवाहरबाग हिंसा को लेकर पक्ष रखा। ग्यारह लोगों ने अपनी बात रखी है। दो दिन बाद पुलिस वालों की गवाही होगी। यह लोग लिखित में अपना पक्ष पहले ही दे चुके हैं।
दीपावली के बाद पेश होंगे अधिकारी
दीपावली के बाद सभी अधिकारी बुलाए जा रहे हैं। मार्च, 2014 से दो जून, 2016 तक जो भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी यहां तैनात रहे थे सभी को अपना पक्ष रखना है। न्यायिक आयोग पहले ही सभी को नोटिस जारी कर चुका है। दीपावली के साथ सभी अधिकारी अपना-अपना पक्ष रखेंगे।