समाजवादी पार्टी में मचे घमासान की यूं तो तमाम वजहें हैं लेकिन एक कारण संगठन में होने वाला बदलाव भी था। 31 जिलों में अध्यक्ष बदले जाने थे। जो सूची तैयार की गई थी उसके अनुसार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सांसद रामगोपाल यादव के करीबी अध्यक्षों का पत्ता साफ हो रहा था। ब्रज क्षेत्र के संगठन में भी परिवर्तन की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी थी। सीएम के विरोध के चलते दीपावली तक सूची को रोक दिया गया था।
सपा के कुनबे का युद्ध जनता के सामने भले ही अब आया है लेकिन अंदरूनी खींचतान महीनों पहले से शुरू हो गई थी। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जुलाई माह में लखनऊ में हुई पार्टी अध्यक्षों की मीटिंग में कहा था कि संगठन में बड़ा फेरबदल होगा। मीटिंग में मंच से इसका एलान हुआ। कुछ अध्यक्षों पर टिप्पणी करते हुए कहा गया था कि वह जमीनों का काम कर रहे हैं। उनकी वजह से संगठन में गुटबाजी हो रही है।
जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तब उन्होंने सबसे पहले उन्हीं अध्यक्षों को बदलने की कवायद शुरू की जिन्हें सपा मुखिया हटाने के लिए पहले इशारा कर चुके थे। सपा सूत्रों के मुताबिक यह सभी वही जिलाध्यक्ष थे जो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव के करीबी हैं। जब प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने इन जिलाध्यक्षों को हटाने वाली सूची सपा मुखिया और मुख्यमंत्री को भेजी तो विवाद बढ़ गया। मुख्यमंत्री ने इन अध्यक्षों को संगठन का वफादार बताते हुए उन्हें न हटाने को कहा। जबकि शिवपाल सिंह यादव इनके स्थान पर नए अध्यक्षों की तैनाती की तैयारी कर चुके थे।
बताया जाता है कि यह सभी मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के करीबी थे। जब विवाद बढ़ा तो सूची को रोक दिया गया था। तय हुआ कि दीपावली के बाद बदलाव कर दिया जाएगा। बताया जाता है कि इनमें आगरा, बरेली, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, झांसी, फैजाबाद और गोरखपुर मंडलों के अंतर्गत आने वाले जनपदों के जिलाध्यक्ष थे।
टिकट बंटवारे पर भी बंटी थी सपा
विधानसभा चुनाव को लेकर जो टिकट बांटे जा रहे हैं उस पर भी सपा बंट रही थी। किसी टिकट पर सपा मुखिया की नाराजगी थी तो किसी पर शिवपाल सिंह यादव की। कहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नाराज थे तो कहीं प्रोफेसर रामगोपाल यादव। स्थिति यह हो गई थी कि कुछ सीटों पर फेरबदल करने की नौबत आ गई थी।